परिचय
7 मई 2025 की सुबह भारत ने चुपचाप लेकिन पुख्ता तैयारी के साथ एक बड़ा कदम उठाया। “ऑपरेशन सिंदूर” नामक इस ऑपरेशन के जरिए तीनों सशस्त्र सेनाओं—वायु सेना, थल सेना और नौसेना—ने संयुक्त रूप से आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक कार्यवाही की। पर मुख्य आकर्षण रहा, भारत की नई वायु रक्षा प्रणाली जिसने पाकिस्तान की जवाबी कार्यवाही का मुंहतोड़ जवाब दिया।

वायु सेना का शानदार आगाज़
भारत की वायु सेना ने एयर डिफेंस तैयारी को शीर्ष स्तर पर रखा। जैसे ही पाकिस्तानी ठिकानों पर सटीक बमबारी हुई, तो ड्रोन और मिसाइल पाकिस्तान की तरफ से वापस भेजे गए। लेकिन भारत का Akash, S-400, SPYDER और MRSAM ने काम करते हुए हर हमले को रोका और सूचना-संग्रह किया।
कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान ने करीब 300–400 ड्रोन भेजे, जिनमें से सभी को प्रभावशाली रूप से रोक दिया गया। इतना ही नहीं, पाकिस्तानी AWACS प्लेन को तकरीबन 300 किमी अंदर मार गिराया गया, और दो F-16 जेट्स को भी नष्ट कर दिया गया ।
इस पूरी प्रक्रिया ने एक स्पष्ट संदेश दिया—आज भारत की सीमाओं में कोई भी खतरा हवा से घुसने का सोच भी नहीं सकता।

नौसेना और थल सेना
ऑपरेशन सिंदूर केवल वायु सेना का संचालन नहीं था। भारतीय नौसेना भी बेहतर सक्षम हथियारों और स्टैंड-ऑफ मिसाइलों के साथ मोर्चे पर तैनात थी, जिससे पाकिस्तान की रणनीतिक ठिकानों में भयंकर खौफ था। भारत की थल सेना ने सीमावर्ती क्षेत्रों में पैदल गश्त (foot patrols) बढ़ाए — यह संकेत था कि ऑपरेशनल तैयारी चरम स्तर पर थी।
चीन-पाक-तुर्की का जाल
भारत के डिप्टी चीफ ऑफ़ आर्मी स्टाफ, लेफ़्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने कहा कि भारत ने अपनी एयर डिफेंस क्षमता केवल पाक सीमा तक सीमित नहीं रखी—चीनी सेना ने लाइव डेटा साझा किया और तुर्की द्वारा दिए गए ड्रोन भी पीछे नहीं रहे। भारत का संदेश बिल्कुल साफ था—“हम हर चुनौती के लिए तैयार हैं”।

ऑपरेशन सिंदूर की रणनीतिक सफलता
- यह अभियान केवल हमला नहीं था—इसके पीछे एक स्पष्ट रणनीति थी।
- भारत ने न सिर्फ हवाई हमले रोके, बल्कि पाकिस्तान की रक्षा और हवाई क्षमता को सम्भावित रूप से गंभीर नुक्सान पहुँचाया।
- साथ ही, यह भारत की वायु रक्षा प्रणाली को परीक्षा और प्रमाणीकरण का अवसर मिला।
भविष्य के संकेत
ऑपरेशन सिंदूर ने भारत के रक्षा रणनीति के लिए नए मार्ग खोले –
- सरकार ने ₹1 लाख करोड़ की रक्षा खरीद की दिशा में तेजी दिखाई है, जिसमें एयर डिफेंस और ड्रोन शामिल हैं ।
- इसके अलावा, भारत अब 52 रक्षा सैटेलाइट 2029 तक लॉन्च करने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है—यह योजना भविष्य की रणनीतिक सुरक्षा की रीढ़ बनेगी ।
नागरिक समर्थन और राजनैतिक महत्त्व
देश के कोने-कोने में “Pride Yatra” जैसे कार्यक्रम आयोजित हुए, जहां ऑपरेशन सिंदूर के नाम पर सेना को सम्मानित किया गया और प्रधानमंत्री ने इसे संयम और आत्म-विश्वास की मिसाल बताया ।
यह समय और परिस्थिति साबित करती है—जब देश का विश्वास सेना और सरकार दोनों पर होता है, तब एक सशक्त राष्ट्र की नींव मजबूत होती है।
निष्कर्ष
ऑपरेशन सिंदूर ने यह साफ़ कर दिया कि अब भारत के आकाश की सुरक्षा एक मात्र रक्षा कदम नहीं, बल्कि एक विकसित और रणनीतिक संरचना का प्रतिनिधित्व करती है।—इसमें नई तकनीकी तैयारियाँ, संयुक्त सैन्य संचालन, और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी शामिल है।
