स्पोर्ट्स

नोएडा (Noida) में फिर से बढ़ता कोरोना बढ़ती लापरवाही का है नतीजा

भूमिका

कोरोना… (Covid 19) एक ऐसा शब्द जो पिछले तीन सालों से हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है। कभी लॉकडाउन, कभी मास्क, कभी सोशल डिस्टेंसिंग, तो कभी वैक्सीन की लंबी कतारें। हम सभी ने किसी ना किसी रूप में इस महामारी को झेला है। और जब ऐसा लगने लगा था कि अब सब कुछ ठीक हो रहा है, ज़िंदगी पटरी पर लौट रही है — तभी एक बार फिर से कोरोना ने दस्तक दी है, खासकर नोएडा (Noida) जैसे शहरी इलाकों में।

आज आई रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में नोएडा में 14 नए कोरोना मरीज़ मिले हैं, जिससे कुल सक्रिय मामलों की संख्या 57 तक पहुँच चुकी है। हालांकि सभी मरीज़ घर पर ही आइसोलेशन (Home Isolation or Quarantine) में हैं और किसी को अस्पताल में भर्ती करने की ज़रूरत नहीं पड़ी है, फिर भी यह स्थिति हमें चेतावनी देती है कि महामारी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

Courtesy – Times of India

 

आंकड़ों की जुबानी

नोएडा में अभी कुल 57 एक्टिव केस हैं, और इनमें से लगभग सभी मरीज हल्के लक्षण (low symptoms) वाले हैं। चिकित्सा विभाग के अनुसार, सभी संक्रमितों को घर पर आइसोलेट किया गया है और डॉक्टरों की टीम समय-समय पर टेलीफोन या वर्चुअल माध्यम से उनकी जांच कर रही है।

अगर हम यूपी की बात करें, तो राज्यभर में भी पिछले कुछ दिनों में नए मामलों में थोड़ा इजाफा देखने को मिला है। स्वास्थ्य विभाग ने फिर से RT-PCR टेस्टिंग बढ़ाने और ज़रूरत पड़ने पर मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के नियम लागू करने की बात कही है।

क्या लक्षण हैं नए मरीजों में?

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस बार सामने आ रहे संक्रमितों में सामान्य लक्षण ही दिखाई दे रहे हैं:

  • हल्का बुखार
  • गले में खराश
  • नाक बहना
  • कभी-कभी हल्की खांसी
  • थकावट

इन लक्षणों को देखकर बहुत से लोग सामान्य फ्लू या वायरल (Flu or Viral) समझकर लापरवाह हो जाते हैं, लेकिन टेस्ट करवाने पर कोरोना पॉजिटिव पाए जाते हैं। यही वजह है कि सरकार और विशेषज्ञ लगातार टेस्ट करवाने की सलाह दे रहे हैं, ताकि संक्रमण और न फैले।

जांच व्यवस्था और टेस्टिंग (Testing)

नोएडा में कई सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में RT-PCR टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा, कई रेजिडेंशियल सोसाइटियों में हेल्थ कैंप लगाकर लोगों की सुविधा अनुसार जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल टीम्स (Mobile Teams) भी एक्टिव हैं और ज़रूरत पर तुरंत मदद पहुंचा रही हैं।

मुफ्त जांच सुविधा अभी भी सरकारी अस्पतालों में जारी है, जिससे हर तबके के लोग इसका फायदा उठा सकें।

क्या जनता फिर से लापरवाह हो गई है?

यह सवाल अब बेहद अहम हो गया है। कोरोना के केस कम होते ही जैसे लोगों ने राहत की सांस ली, मास्क गायब हो गए, सैनेटाइज़र की बोतलें दराज में बंद हो गईं, और सोशल डिस्टेंसिंग की जगह भीड़भाड़ ने ले ली।

शादी-विवाह, स्कूल, मॉल, मेट्रो, ऑफिस — हर जगह भीड़ का आलम है, लेकिन सावधानी नदारद है।

यही वजह है कि अब जब केस फिर से उभर रहे हैं, तो हम तैयार नहीं हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *