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महंगी कारों का ख्वाब अब हकीकत के करीब

कभी आपने सोचा है कि अपनी पसंदीदा रोल्स-रॉयस (Rolls-Royce) में बैठकर शहर की सड़कों पर घूमें, या किसी बुर्बेरी (Burberry) के ट्रेंच कोट में खुद को लिपटा हुआ महसूस करें? ये सपने, जो पहले दूर की कौड़ी लगते थे, अब भारत में हकीकत के करीब आने वाले हैं। जी हाँ, भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) पर गुरुवार, 24 जुलाई 2025 को लंदन में हस्ताक्षर हो गए हैं, और इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ने वाला है। अब ब्रिटेन से आने वाली लग्जरी कारें, स्कॉच व्हिस्की और ब्रांडेड कपड़े भारत में सस्ते होने वाले हैं!

यह सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि दो देशों के बीच आर्थिक दोस्ती का एक नया अध्याय है, जो भविष्य में व्यापार और निवेश के नए रास्ते खोलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) की मौजूदगी में हुए इस समझौते ने दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है।

Courtesy – Times of India

 

क्या है यह FTA और क्यों है यह इतना खास?

तो, सबसे पहले समझते हैं कि यह FTA (Free Trade Agreement) क्या होता है…?

सरल शब्दों में कहें तो, यह दो या दो से अधिक देशों के बीच एक समझौता है, जिसके तहत वे एक-दूसरे के सामानों और सेवाओं पर लगने वाले आयात शुल्क (Import Duty) या टैरिफ (Tariff) को कम करते हैं या पूरी तरह खत्म कर देते हैं। इसका मकसद व्यापार को आसान बनाना, सामानों को सस्ता करना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।

भारत और यूके के बीच यह FTA कोई रातोंरात तय नहीं हुआ है। इसकी बातचीत जनवरी 2022 में शुरू हुई थी और इसे अंतिम रूप देने में तीन साल लग गए, जिसमें 14 दौर की लंबी और गहन बातचीत शामिल थी। कई मुश्किल मुद्दों पर चर्चा हुई, जैसे ब्रिटेन चाहता था कि भारत शराब पर टैरिफ कम करे, वहीं भारत की मांग थी कि ब्रिटेन हमारे कुशल पेशेवरों (Skilled Professionals) के लिए वीज़ा नियमों को आसान बनाए और उन्हें

Courtesy – India TV News

 

सामाजिक सुरक्षा (Social Security) प्रदान करे। अंततः, दोनों देशों ने एक संतुलित समझौता किया, जो दोनों के हितों का ध्यान रखता है। यह समझौता दिखाता है कि धैर्य और रणनीतिक सोच से कैसे बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

आपकी पसंदीदा लग्जरी चीजें अब होंगी सस्ती!

इस समझौते का सबसे रोमांचक पहलू भारत के आम उपभोक्ता के लिए है – खास तौर पर उन लोगों के लिए जो लग्जरी उत्पादों का शौक रखते हैं।

  1. लग्जरी कारें – यह सबसे बड़ी खबर है! अब ब्रिटेन में बनीं लग्जरी कारों जैसे रोल्स-रॉयस (Rolls-Royce), जगुआर (Jaguar), लैंड रोवर (Land Rover) जैसी गाड़ियों पर भारत में लगने वाला आयात शुल्क 100% से ज़्यादा घटकर कोटा मैकेनिज्म (Quota Mechanism) के तहत 10% तक आ जाएगा। इसका मतलब है कि इन कारों की कीमतें काफी कम हो जाएंगी, जिससे इन्हें खरीदना अब ज़्यादा लोगों के लिए संभव हो पाएगा।
  2. स्कॉच व्हिस्की और जिन (Gin) – शराब के शौकीनों के लिए भी अच्छी खबर है। ब्रिटेन से आने वाली स्कॉच व्हिस्की और जिन पर लगने वाला टैरिफ तुरंत 150% से घटकर 75% हो जाएगा। इतना ही नहीं, अगले 10 सालों में इसे धीरे-धीरे 40% तक कम कर दिया जाएगा। इससे स्कॉच व्हिस्की और जिन भारत में काफी सस्ती और ज़्यादा सुलभ हो जाएंगी।
  3. ब्रांडेड कपड़े और फुटवियर (Footwear) – फैशनपरस्तों के लिए भी यह समझौता खुशखबरी लाया है। ब्रिटेन से आयात होने वाले जूते, कपड़े, फैशन से जुड़े सामान और चमड़े के उत्पादों पर भी शुल्क
  4. कम होगा। कुछ मामलों में तो यह टैक्स शून्य तक भी हो सकता है, जिससे बुर्बेरी (Burberry), पॉल स्मिथ (Paul Smith) जैसे ब्रांडेड कपड़ों और एक्सेसरीज की कीमतें घटेंगी।
  5. अन्य उत्पाद – यह सिर्फ कारों और कपड़ों तक सीमित नहीं है। ब्रिटेन से आयातित सॉफ्ट ड्रिंक्स (Soft Drinks), कॉस्मेटिक्स (Cosmetics), मेडिकल डिवाइसेस (Medical Devices), एयरोस्पेस पार्ट्स (Aerospace Parts), और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद (Electronic Products) जैसे मोबाइल और लैपटॉप भी सस्ते हो सकते हैं। यूके से आने वाले आभूषणों और रत्नों पर भी कस्टम ड्यूटी घटने से उनकी कीमतों में कमी आ सकती है।
Courtesy – SMMT

 

हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि ब्रिटेन से आने वाली कुछ हाई-एंड कारों और बाइकों पर टैरिफ छूट सीमित रह सकती है, जिससे उनकी कीमतें बढ़ भी सकती हैं। इसी तरह, मेटल और स्टील प्रोडक्ट्स जैसी कुछ चीजें भी महंगी हो सकती हैं क्योंकि यूके के हाई-क्वालिटी मेटल को भारत में जगह मिलने से घरेलू उद्योगों पर प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ेगा। लेकिन कुल मिलाकर, भारतीय उपभोक्ता के लिए सस्ते आयातित उत्पादों की एक नई दुनिया खुलने वाली है।

भारत के लिए ‘ब्रांड इंडिया’ को बढ़ावा और रोज़गार के नए अवसर

यह समझौता सिर्फ ब्रिटेन के उत्पादों को भारत में सस्ता नहीं करेगा, बल्कि भारत के लिए भी कई बड़े फायदे लेकर आएगा। इस FTA के तहत, भारत से ब्रिटेन को किए जाने वाले लगभग 99% निर्यात (Exports) पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। यह भारत के उन श्रम-प्रधान क्षेत्रों (Labor-Intensive Sectors) के लिए एक बहुत बड़ी जीत है, जो लाखों लोगों को रोज़गार देते हैं।

  • टेक्सटाइल और कपड़े – बनारसी और चंदेरी जैसे पारंपरिक वस्त्रों से लेकर आधुनिक रेडीमेड कपड़ों तक, भारतीय टेक्सटाइल उत्पादों को ब्रिटेन के विशाल बाज़ार में बिना किसी टैरिफ के पहुंच मिलेगी। इससे भारतीय कारीगरों और कपड़ा उद्योग को बड़ा फायदा होगा।
  • चमड़ा और फुटवियर – हाथ से बने कोल्हापुरी जूते और अन्य चमड़े के उत्पादों को ब्रिटेन में बिना टैरिफ निर्यात करने की अनुमति मिलेगी, जिससे इस सेक्टर में काम करने वाले लाखों कारीगरों की आय बढ़ेगी।
  • रत्न और आभूषण – भारतीय रत्न और आभूषणों को भी ब्रिटेन के बाज़ार में आसान पहुंच मिलेगी।
  • फार्मास्यूटिकल्स और इंजीनियरिंग: भारतीय जेनेरिक दवाओं और इंजीनियरिंग उत्पादों की ब्रिटेन के बाज़ार में प्रतिस्पर्धात्मकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

यह समझौता भारत के निर्यात को बढ़ावा देगा और अनुमान है कि आने वाले कुछ वर्षों में भारत का निर्यात 10 से 12 अरब डॉलर (लगभग 86 हजार करोड़ से 1.1 लाख करोड़ रुपये) तक बढ़ सकता है। इससे भारतीय मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing), टेक्सटाइल (Textile), मरीन (Marine) और ज्वेलरी (Jewelry) सेक्टर में नए रोज़गार के अवसर पैदा होंगे, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि को और गति मिलेगी।

आर्थिक संबंधों का रणनीतिक महत्व और भविष्य की राह

भारत-यूके FTA का मक़सद 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर लगभग 120 अरब डॉलर (लगभग 9.9 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचाना है। यह केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम भी है।

ब्रिटेन के लिए, यह ब्रेक्जिट (Brexit) के बाद नए व्यापारिक साझेदार ढूंढने और अपनी वैश्विक पहुंच बढ़ाने का एक बड़ा अवसर है। वहीं, भारत के लिए, यह अपने निर्यात बाज़ारों में विविधता लाने और पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण ज़रिया है।

इस समझौते में सिर्फ वस्तुओं का व्यापार ही नहीं, बल्कि सेवाओं, सरकारी खरीद, बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights) और निवेश जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। दोनों देशों के पेशेवरों और कंपनियों को भी कामकाज में ज़्यादा सहूलियत मिलेगी। इसके अलावा, एक सामाजिक सुरक्षा समझौता (Social Security Agreement) भी हुआ है, जिससे ब्रिटेन में सीमित समय के लिए काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को सामाजिक सुरक्षा फंड में दोहरा योगदान देने से छूट मिलेगी।

यह FTA यह भी दर्शाता है कि कैसे दो देश, धैर्य और आपसी सम्मान के साथ, एक संतुलित और टिकाऊ व्यापार समझौता कर सकते हैं, बजाय इसके कि धमकियों या दबाव में कोई समझौता करें। यह एक मिसाल है कि कैसे मजबूत और दीर्घकालिक व्यापारिक साझेदारियां विश्वास और सहयोग पर बनती हैं।

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