ईरान की इस परमाणु धमकी से शुरू हुआ पाकिस्तान-ईरान-इज़राइल के इर्द‑गिर्द सुरक्षा-संकट

परिचय
2 दिन पहले ईरानी IRGC (Islamic Revolutionary Guard Corps) के वरिष्ठ जनरल मोहसन रेज़ाई ने एक सनसनीखेज बयान दिया:
“अगर ईरान पर परमाणु हमला होता है, पाकिस्तान भी इज़राइल पर परमाणु हमले के साथ जवाब देगा।”
इस एक वाक्य ने सीमाओं से परे, मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया का सुरक्षा परिदृश्य हिला दिया। इस ब्लॉग में हम बताएंगे —
- “इस्लामिक बम” की अवधारणा की पृष्ठभूमि
- पाकिस्तान की परमाणु शक्ति का इतिहास और रणनीति
- रेज़ाई के बयान के पीछे तथ्य और विरोध
- क्षेत्रीय और वैश्विक प्रतिक्रियाएँ
- निष्कर्ष: क्या यह सिर्फ बयानबाज़ी है, या दुनिया एक नए परमाणु युद्ध की तरफ बढ़ रही है?
“इस्लामिक बम”
1974 में भारत के परमाणु परीक्षण ‘स्माइलिंग बुद्धा’ के तुरंत बाद, पाकिस्तान के तत्कालीन PM ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो ने कहा:
“हिंदू, यहूदी, ईसाई, कम्युनिस्ट… परमाणु हथियार बना चुके हैं, अब सिर्फ इस्लाम ही दूर है।”
यह विचार—“इस्लामिक बम”—न केवल पाकिस्तान में बल्कि मध्य-पूर्व में एक सामूहिक इस्लामिक ‑युद्ध की कल्पना को जन्म देता है।
पाकिस्तान का परमाणु सफर
- Project-706 (1972–83): पाकिस्तान के गुप्त परमाणु कार्यक्रम की शुरुआत, जिसे ‘मैनहैटन प्रोजेक्ट’ की तरह बताया जाता है।
- Chagai-I & II परीक्षण (28 मई 1998): पाकिस्तान ने परमाणु शक्ति संपन्न की घोषणा कर ‘Youm-e-Takbir’ के रूप में राष्ट्रीय त्योहार मनाया।
- A.Q. खान: पाकिस्तान के परमाणु निर्माता, जिन्होंने अपने नेटवर्क से अन्य देशों (लीबिया, ईरान, उत्तर कोरिया) को भी परमाणु तकनीक मुहैया कराई।
रणनीतिक सिद्धांत
- पाकिस्तान ने ‘मिनिमम न्यूक्लियर डिटरेंस’ और ‘फर्स्ट‑यूज़’ स्ट्रैटेजी अपनाई ।
- Shaheen-III मिसाइल (~2750 कि.मी.) पूरे भारत और इज़राइल तक पहुंचती है।
- परमाणु हथियार को पारंपरिक शक्ति की पूरक रणनीति के तौर पर बनाया गया।
रेज़ाई का आधिकारिक दावा और पाकिस्तान की सफाई
- रेज़ाई: “पाकिस्तान ने ईरान से कहा — यदि इज़राइल हमला करता है, तो हम भी हमले का जवाब देंगे”।
- पाकिस्तान सरकार: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इसे ‘झूठा, निराधार और अपनी नीति से भिन्न’ बताया।
क्या पाकिस्तान की भूमिका बदल रही है?
- ईरानी बयान ने मुस्लिम दुनिया को सक्रिय भूमिका के लिए प्रेरित किया।
- शाहीन-III की पहुंच ने पाक‑ईरान रणनीतिक सहयोग की संभावनाओं को उजागर किया।
वैश्विक सुरक्षा चिंताएँ
- मौजूदा दुनिया में ऐसे नौ देश परमाणु हथियार रखते हैं — अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, UK, भारत, पाकिस्तान, इज़राइल, और उत्तर कोरिया।
- इस्लामिक बम की बात दुनिया को याद दिलाती है कि परमाणु विघटन की संभावनाएँ चौतरफा हैं।
गलत जानकारी और साजिश?
- सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें और एकतरफ़ा बयान फैले—जिससे हालात गंभीर हो सकते थे।
- नुकसान: परमाणु एकता की अफवाह पनपी और परमाणु सैन्य संघर्ष की आशंका बनी।
इस्लाम और परमाणु हथियार पर नैतिक दृष्टिकोण
- मुस्लिम देशों के बीच एकता का आह्वान इस्लामी भावनाओं पर आधारित रही, पर कदम उठाने के स्तर पर व्यावहारिकता नहीं दिखी।
- इस्लामिक बम की अवधारणा एक मनोवैज्ञानिक युद्ध का पुराना किस्सा बन चुकी है, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में इसकी पुनरावृत्ति दिखाई नहीं देती।
भारत की प्रतिक्रिया और सुरक्षा उपाय
- भारत सतर्क रहा—पाकिस्तान-भारत सीमा पर हाल की तनाव पूर्ण घटना भी इसी तरह की परमाणु बातचीत के बीच हुई ।
- सरकारी सुरक्षा एजेंसियों ने वरिष्ठ अधिकारी और रणनीतिक संस्थाओं को अलर्ट रखा।
- diplomatic स्तर पर भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और NPT मानदंडों को मजबूत बनाए रखा।
निष्कर्ष
इस पूरी परिस्थिति में तीन संभावनाएं उभरती हैं:
- एक रणनीतिक डर पैदा करने वाला बयान — जो पाकिस्तान को समर्थन और कूटनीतिक ताकत मिलते दिखाई जान पड़ता है।
- ईरान‑पाकिस्तान सामरिक गठजोड़ — जो मध्य-पूर्व-एशिया की गुटबंदी की परिधि में हो सकता है।
- एक राजनीतिक भ्रम — जहाँ बयान सिर्फ आंतरिक भ्रम फैलाने और इस्लामिक मित्र देशों को खुश करने के लिए दिया गया।
लेकिन यह स्पष्ट है कि इस्लामी दुनिया का सामूहिक बयान खुद में एक चेतावनी है, और वैश्विक सुरक्षा के लिए एक वेकअप कॉल—कि परमाणु धमकी राष्ट्रीय सुरक्षा के स्तर पर एक व्यापक संकट है।
