हरियाणा की हिसार निवासी और लोकप्रिय ट्रैवल यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उसकी गिरफ्तारी ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा को होने वाले खतरों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कौन है ज्योति मल्होत्रा?
ज्योति मल्होत्रा, हिसार की रहने वाली एक ट्रैवल ब्लॉगर है, जो “Travel with Jo” नामक यूट्यूब चैनल चलाती है। उसके चैनल पर 3.77 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स थे, और वो अपने यात्रा व्लॉग्स के लिए जानी जाती थी। उसकी सोशल मीडिया उपस्थिति ने उसे एक प्रभावशाली डिजिटल व्यक्तित्व बना दिया था।
गिरफ्तारी और आरोप
हिसार पुलिस ने ज्योति को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। उस पर भारतीय गोपनीय जानकारी को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI को साझा करने का आरोप है। उसके खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 की धारा 3, 4 और 5 और भारतीय दंड संहिता की धारा 152 के तहत मामला दर्ज किया गया है। उसकी गिरफ्तारी के बाद उसे पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
पाकिस्तानी संपर्क और यात्रा
जांच के अनुसार, ज्योति ने 2023 में दो बार पाकिस्तान की यात्रा की थी। इन यात्राओं के दौरान, उसने पाकिस्तान उच्चायोग के एक अधिकारी एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से संपर्क स्थापित किया। दानिश ने उसे पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों से मिलवाया, जिनमें अली एहवान, शाकिर और राणा शाहबाज शामिल हैं। ज्योति ने इन संपर्कों को छिपाने के लिए शाकिर का नाम “जट्ट रंधावा” के रूप में सेव किया था।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग
ज्योति ने अपने पाकिस्तानी संपर्कों के साथ व्हाट्सएप, टेलीग्राम और स्नैपचैट जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से संपर्क बनाए रखा। उसने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पाकिस्तान की सकारात्मक छवि प्रस्तुत करने वाले कंटेंट साझा किए, जो कथित रूप से एक समन्वित प्रभाव अभियान का हिस्सा था।

जासूसी नेटवर्क और अन्य गिरफ्तारियां
ज्योति की गिरफ्तारी ने हरियाणा और पंजाब में फैले एक व्यापक जासूसी नेटवर्क का खुलासा किया है। इस नेटवर्क में छह भारतीय नागरिक शामिल हैं, जिनमें पंजाब के मलेरकोटला की 32 वर्षीय विधवा गुज़ाला भी शामिल है। अन्य गिरफ्तारियों में यामीन मोहम्मद, देविंदर सिंह ढिल्लों और अरमान शामिल है, जो विभिन्न तरीकों से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लिए काम कर रहे थे।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव
यह मामला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरे को उजागर करता है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग करके विदेशी खुफिया एजेंसियां भारतीय नागरिकों को अपने जाल में फंसा रही हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल युग में सतर्कता और जागरूकता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
निष्कर्ष
ज्योति मल्होत्रा का मामला हमें यह सिखाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करते समय सतर्क रहना कितना आवश्यक है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को चाहिए कि वे ऐसे मामलों की गहन जांच करें और नागरिकों को जागरूक करें ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।
