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Gallbladder Stone की सही जानकारी ही – एक मात्र उपचार है।

परिचय — पित्ताशय (Gallbladder Stone) की पथरी क्या है?

हमारे शरीर में कई ऐसे अंग होते हैं, जिनके बारे में हम बहुत कम जानते हैं, जब तक कि वो तकलीफ़ न देने लगें। पित्ताशय (Gallbladder) भी ऐसा ही एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण अंग है। आमतौर पर लोग इसके बारे में तभी जानते हैं जब डॉक्टर उन्हें बताते हैं कि उनके पित्ताशय में पथरी बन गई है।

 पित्ताशय की पथरी आखिर होती क्या है?

पित्ताशय की पथरी, जिसे अंग्रेज़ी में Gallstones कहते हैं, दरअसल एक तरह के कठोर कण होते हैं जो पित्ताशय के अंदर बनते हैं। ये पथरियाँ कोलेस्ट्रॉल, पित्त लवण, या बिलिरुबिन जैसी चीज़ों से बन सकती हैं। आकार में ये एक रेत के कण से लेकर एक बड़े बादाम जितनी हो सकती हैं।

Courtesy – WebMD

 

पित्ताशय की पथरी कितनी सामान्य बीमारी है?

आज के समय में यह बीमारी बेहद आम हो चुकी है, खासकर महिलाओं, 40 वर्ष से ऊपर की उम्र वाले लोगों, और मोटापे से ग्रसित व्यक्तियों में। भारत में हर साल लाखों लोग पित्ताशय की पथरी के कारण परेशान होते हैं, और इनमें से कई लोगों को ऑपरेशन तक कराना पड़ता है।

यह पथरी कैसे बनती है?

जब पित्त (bile) में मौजूद तत्वों का संतुलन बिगड़ जाता है, जैसे कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक हो जाता है या पित्त में पिगमेंट (Pigment) ज़्यादा बनने लगता है, तो ये धीरे-धीरे जमने लगते हैं और पथरी का रूप ले लेते हैं। यदि ये पथरियाँ बहुत छोटी हैं, तो ये बिना लक्षणों के भी रह सकती हैं। लेकिन जब ये बड़ी हो जाती हैं या रास्ता अवरुद्ध करने लगती हैं, तो तेज़ दर्द, उल्टी, और पाचन समस्याएं शुरू हो जाती हैं।

क्या पथरी बिना लक्षणों के भी हो सकती है?

हां, लगभग 80% मामलों में पित्ताशय की पथरी बिना किसी लक्षण के रहती है। लेकिन जब ये पथरियाँ किसी नली को जाम कर देती हैं या पित्त के प्रवाह को रोकती हैं, तो गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसी कारण कई बार यह अचानक सामने आती है — जब तकलीफ़ बहुत बढ़ जाती है।

क्यों है यह विषय इतना महत्वपूर्ण?

इसलिए कि यह बीमारी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती है, और अगर समय पर इलाज न हो, तो यह दिल  (liver), अग्न्याशय (pancreas) और पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकती है। कभी-कभी तो हालत इतनी बिगड़ जाती है कि इमरजेंसी सर्जरी की ज़रूरत पड़ जाती है।

इस ब्लॉग श्रृंखला में आपको जानने को मिलेगा

  • पित्ताशय का शरीर में क्या काम है?

  • पथरी बनने के कारण क्या हैं?

  • कैसे पहचाने कि पथरी है?

  • इलाज के विकल्प और बचाव के तरीके क्या हैं?

  • और कुछ सच्ची कहानियाँ, जो आपको सतर्क कर सकती हैं।

पित्ताशय का कार्य और शरीर में इसकी भूमिका

हमारे शरीर का हर अंग किसी खास वजह से होता है। पित्ताशय (Gallbladder) छोटा ज़रूर होता है, लेकिन इसका काम बड़ा और अहम है, खासकर पाचन तंत्र (Digestive System) में। जब हम खाने का एक निवाला लेते हैं, तब से ही शरीर का एक जटिल सिस्टम एक्टिव हो जाता है — जिसमें पित्ताशय चुपचाप मगर प्रभावी भूमिका निभाता है।

पित्ताशय कहां स्थित होता है?

पित्ताशय एक छोटा सा थैलीनुमा अंग होता है, जो हमारे दिल – जिगर (लिवर) के ठीक नीचे, दाहिनी ओर पेट के ऊपरी हिस्से में स्थित होता है। इसका आकार नाशपाती जैसा होता है और लंबाई लगभग 7–10 सेमी होती है।

Courtesy – Health

 

पित्ताशय का मुख्य कार्य क्या है?

पित्ताशय का मुख्य कार्य है — पित्त (bile) को संग्रहित करना और ज़रूरत पड़ने पर पाचन तंत्र में भेजना।

 पित्त (Bile): यह एक पीले-हरे रंग का तरल होता है जो लिवर में बनता है और वसा (Fat) के पाचन में मदद करता है।

जब हम कोई वसायुक्त भोजन खाते हैं (जैसे पराठा, पूड़ी, घी, पनीर आदि), तो शरीर को इस वसा को तोड़ने के लिए पित्त की ज़रूरत होती है। ऐसे में पित्ताशय सिकुड़ता है और जमा हुआ पित्त छोटी आंत में छोड़ता है, जिससे खाना ठीक से पचता है।

 

पित्त में क्या-क्या होता है?

पित्त में कई तरह के तत्व होते हैं, जैसे:

  • बाइल सॉल्ट्स (Bile salts) – वसा को घुलनशील बनाने में मदद करते हैं

  • कोलेस्ट्रॉल – प्राकृतिक रूप से मौजूद रहता है

  • बिलिरुबिन – लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने से बनता है

  • पानी, इलेक्ट्रोलाइट्स, और एंज़ाइम्स

जब इन तत्वों का संतुलन बिगड़ता है, तभी पथरी बनने का खतरा पैदा होता है।

 

पित्ताशय और लिवर का संबंध

पित्ताशय और लिवर आपस में गहराई से जुड़े होते हैं। लिवर लगातार पित्त बनाता रहता है और इसे पित्ताशय में जमा करता है। जब तक खाना नहीं खाया जाता, पित्त वहीं जमा रहता है। जैसे ही खाना पेट में जाता है, खासकर फैट वाला, एक सिग्नल मिलता है और पित्ताशय तुरंत एक्टिव होकर पित्त को बाहर भेजता है।

यह पूरा सिस्टम बहुत संतुलित होता है, लेकिन अगर पित्त बहुत गाढ़ा हो जाए या पथरी बन जाए, तो यह प्रवाह बाधित हो जाता है।

 

जब पित्ताशय में गड़बड़ी हो तो क्या होता है?

अगर पथरी बन जाए या पित्त का प्रवाह बाधित हो, तो निम्न समस्याएं सामने आती हैं:

  • तेज पेट दर्द (खासकर दाहिनी तरफ)
  • खाना पचने में दिक्कत
  • गैस, उल्टी, और मतली
  • पीठ और कंधे तक दर्द
  • त्वचा या आंखें पीली पड़ना (अगर जॉन्डिस हो जाए)
Courtesy – GEM Hospitals

 

क्या पित्ताशय के बिना जीवन संभव है?

हां, यदि पथरी या संक्रमण बहुत गंभीर हो जाए तो डॉक्टर पित्ताशय को निकाल देते हैं — इसे कहते हैं Cholecystectomy। बिना पित्ताशय के भी व्यक्ति ज़िंदा रह सकता है, लेकिन खाने की आदतों में थोड़े बदलाव करने पड़ते हैं।

क्यों ज़रूरी है इसकी देखभाल?

क्योंकि पाचन की नींव यहीं से पड़ती है। अगर पित्त का प्रवाह सही नहीं हो, तो वसा का पाचन नहीं हो पाएगा, जिससे पाचन संबंधी बीमारियाँ, वजन बढ़ना, लिवर पर दबाव, और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।


पित्ताशय में पथरी बनने के मुख्य कारण

पित्ताशय की पथरी (Gallbladder Stones) कोई अचानक होने वाली बीमारी नहीं है। यह धीरे-धीरे बनती है, और जब तक लक्षण सामने नहीं आते, तब तक कई लोग इसकी मौजूदगी से अनजान रहते हैं। लेकिन सवाल यह है कि ऐसी पथरी बनती क्यों है? इसका सीधा संबंध हमारी दिनचर्या, खानपान और शरीर में रासायनिक असंतुलन से है।

1. कोलेस्ट्रॉल की अधिकता

यह सबसे आम कारणों में से एक है। जब पित्त में बहुत अधिक कोलेस्ट्रॉल होता है और वह घुल नहीं पाता, तब वह जमने लगता है और धीरे-धीरे कण बनते हैं — जो बाद में पथरी का रूप ले लेते हैं।

अक्सर मोटापे से ग्रस्त लोगों, जंक फूड (Junk food) खाने वालों और शारीरिक गतिविधि कम करने वालों में कोलेस्ट्रॉल की अधिकता पाई जाती है।

2. पित्त में बाइल सॉल्ट्स की कमी

बाइल सॉल्ट्स, कोलेस्ट्रॉल को घुलनशील बनाए रखते हैं। लेकिन अगर शरीर पर्याप्त बाइल सॉल्ट्स नहीं बना पाता, तो कोलेस्ट्रॉल जमना शुरू हो जाता है।

  •  यह कमी लंबे समय तक अनियमित खानपान, क्रैश डाइटिंग या पोषण की कमी से हो सकती है।

3. पित्ताशय पूरी तरह खाली नहीं होता

कई बार ऐसा होता है कि खाना खाने के बाद भी पित्ताशय पूरी तरह से पित्त को बाहर नहीं निकाल पाता। इससे अंदर बचे हुए पित्त में जमाव शुरू होता है, जो आगे चलकर पथरी में बदल सकता है। यह समस्या उम्र बढ़ने के साथ बढ़ सकती है, खासकर महिलाओं में।

4. हार्मोनल असंतुलन

गर्भवती महिलाओं, गर्भनिरोधक गोलियाँ लेने वाली महिलाओं, और हार्मोनल थेरेपी से गुजर रही महिलाओं में पित्त की स्थिति में बदलाव आ सकता है, जिससे पथरी बनने का खतरा अधिक होता है।

5. आनुवांशिक कारण (Genetics)

अगर आपके परिवार में किसी को पित्त की पथरी रही हो, तो आपके लिए भी यह खतरा थोड़ा बढ़ जाता है। यह एक जेनेटिक डिस्पोजीशन (Genetic Disposition) की तरह काम करता है।

6. वजन का अत्यधिक बढ़ना या जल्दी घटाना

  • मोटापा पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ा देता है।
  • वहीं अगर आप बहुत जल्दी वजन घटाते हैं (Crash Diet), तो यह भी पित्ताशय को प्रभावित करता है और पथरी बन सकती है।

यह खासकर उन लोगों में देखा गया है जो वजन घटाने के लिए सिर्फ सलाद या फल खाते हैं और वसा का सेवन पूरी तरह बंद कर देते हैं।

7. डायबिटीज और लीवर की बीमारियाँ

डायबिटीज के मरीजों में भी पित्त की पथरी की संभावना अधिक होती है, क्योंकि उनके शरीर में वसा के मेटाबोलिज्म की प्रक्रिया कमजोर हो जाती है। लिवर के पुराने रोग या सिरोसिस भी पित्त के प्रवाह को प्रभावित करते हैं।

8. खानपान की आदतें

यह आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में सबसे अहम कारण बन चुका है:

  • बार-बार भूखा रहना
  • एक बार में बहुत अधिक खाना
  • जंक फूड, तले-भुने और वसायुक्त भोजन
  • पर्याप्त पानी न पीना
  • फाइबर की कमी

यह सब पाचन प्रक्रिया को बिगाड़ता है और पित्त के स्राव को असंतुलित कर देता है।

9. फिजिकल एक्टिविटी की कमी

शरीर की गतिविधि जितनी कम होगी, उतना ही ज्यादा शरीर में फैट जमा होगा और पाचन धीमा पड़ेगा। इससे पित्त जमाव की संभावना बढ़ती है।

 आजकल sedentary lifestyle यानी बैठकर काम करने वाले लोगों में यह समस्या ज्यादा देखी जा रही है।

10. आयु और लिंग

  • महिलाएं, विशेषकर गर्भावस्था के दौरान और 40 की उम्र के बाद
  • 40 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष
  • ज्यादा बच्चों वाली महिलाएं (multiple pregnancies)

इनमें पित्त की पथरी का खतरा तुलनात्मक रूप से अधिक होता है।

निष्कर्ष: पित्त की पथरी अचानक नहीं होती, यह हमारे जीवनशैली और खानपान की आदतों का परिणाम होती है। समय रहते यदि ऊपर लिखे गए बातों का ध्यान रखें, तो इस गंभीर समस्या से बचा जा सकता है।


साभार – यह ब्लॉग हिंदी दैनिक – दैनिक भास्कर से प्रेरित है।  

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