जनरल

G7 Summit 2025 और भारत

कैसे पीएम मोदी ने वैश्विक मंच पर भारत की अध्यक्षता और वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को जगह दी

भूमिका 

  • स्थल: कना‍डा का खूबसूरत स्थल Kananaskis, Alberta
  • तारीख: 16–17 जून 2025 — 51वाँ G7 सम्मेलन।
  • सदस्य देश: Canada (hosts), USA, UK, France, Germany, Italy, Japan
  • आमंत्रित अतिथि: भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका, युक्रेन, EU, UN और World Bank

यह पहली बार है जब मोदी कनाडा G7 समिट में जा रहे हैं—यह उनकी कूटनीतिक पकड़ को दर्शाता है ।

Modi की रणनीतिक शुरुआत

Modi जी ने 16 जून की सुबह Calgary पहुंचकर अपने  

तीन-राष्ट्र के दौरे (Cyprus → Canada → Croatia) के हिस्से के रूप में सम्मेलन की शुरुआत की।

उनका स्वागत स्थानीय भारतीय प्रवासी समुदाय, Canadian PM Mark Carney और ‘Indian diaspora’ द्वारा जिसे Reuters ने “India is not just attending, it is leading the conversation” बताया।

Courtesy – NDTV

 

Modi का प्रभाव 

  • मुख्य विषयों पर चर्चा: ऊर्जा सुरक्षा, AI-ऊर्जा कनेक्शन, क्वांटम तकनीक (Quantum Technologies, ग्लोबल़ दक्षिण की प्राथमिकताएँ ।
  • द्वीपक्षीय मिलन (Bilateral Meetings): US, UK, फ्रांस, जापान, कनाडा सहित कई शक्तिशाली राष्ट्रों से रणनीतिक वार्ता हुई।
  • मुख्य बातें: अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिकी देशों के लिए अधिक सहयोग, AI तथा ऊर्जा संसाधनों में शामिल करना, और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करना।

ग्लोबल साउथ की आवाज़

Modi जी ने कहा कि “G7 को ग्लोबल साउथ की समस्याओं को सुनना चाहिए—जैसे जलवायु अनुकूलन, ऊर्जा पहुंच, विकासशील देशों को तकनीकी सहायता।”
कनाडा में मौजूद प्रवासी समुदाय ने भी कहा कि इस भाषण से संकेत मिलता है कि भारत अब विश्वविद्यालयों की आवाज़ बन गया है, सिर्फ मजबूती से कूटनीति नहीं कर रहा, बल्कि निर्णय निर्माता भी बन रहा है ।

Courtesy – Mint

 

यूक्रेन-रूस और मध्य-पूर्व की पृष्ठभूमि

  • रूस-यूक्रेन युद्ध एक मुख्य मुद्दा था, जिसमें G7 ने रूस की आलोचना की, लेकिन भारत ने संतुलन बनाए रखा ।
  • मध्य-पूर्व में ईरान–इजराइल तनाव, साथ ही Trump द्वारा “Iran can never have nuclear weapon” बयान और Tehran को पलायन की सलाह, G7 में प्रमुख मुद्दे थे।

Modi ने शांति संवाद की वकालत करते हुए कहा: “युद्ध समाधान नहीं; संवाद और कूटनीति.” ऐसा तर्क वैश्विक संघर्ष को रोकने में भारत की भूमिका को दर्शाता है।

डिजिटल सार्वजनिक ढांचा (DPI) भारत की ताक़त

Modi ने G7 में डिजिटल सार्वजनिक ढाँचा—जैसे आधार, CoWIN, UPI—को विकासशील देशों के लिए साझा करने का प्रस्ताव रखा ।
MEA के प्रवक्ता ने कहा कि भारत AI‑ऊर्जा, क्वांटम और इंफ्रास्ट्रक्चर पर G7 के सहयोग का साझेदार बन रहा है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म की इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) और नागरिक-सुविधा को बढ़ाते हुए, भारत ने दुनिया को दिखाया कि टेक्नोलॉजी के ज़रिए विकास संभव है।

ऊर्जा और पर्यावरण में भारत का योगदान

Modi ने निम्नलिखित भूमिकाओं पर ज़ोर दिया:

  • बिजली उत्पादन में नवीकरणीय (Renewable Energy) स्रोतों का 2030 तक 50% लक्ष्य
  • ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात
  • International Solar Alliance की वैश्विक भूमिका
  • विकसित देशों की जिम्मेदारी और ग्लोबल साउथ की सम्मिलित भागीदारी

व्यापार और रणनीति

  • मोदी और Carney ने भारत-कनाडा रिश्ते को सुधारने की राह खोली—वैश्विक निवेश, व्यापार समझौते हेतु प्लेटफॉर्म तैयार।
  • व्यापार वार्ता में AI‑ऊर्जा, क्लाइमेट टेक्नोलॉजी, और शिक्षा एक्सचेंज पर ध्यान रहा।

मीडिया की रिपोर्टिंग

  • Reuters: “India is asserting global responsibility without choosing sides”.
  • Times of India: Coverage of “India’s priorities: energy, security, innovation” ﹣ “Expressed Airie” termed as strong presence.
  • Indian Express: Highlighted Iran nuclear non-proliferation stance.
  • The Indian Eye: Indo-Canadian community ने स्वागत में कहा: “अब रिश्ता सुधरेगा”।

कूटनीतिक विश्लेषण

  • संतुलित दृष्टिकोण: भारत युद्ध-विरोधी, समावेशी विकास, और तकनीक को लेकर एक नई नीति पर चल रहा है।
  • वैश्विक (Global) South की पहचान: अन्य देशों के दृष्टिकोण  से भारत की नीति ज़ोरदार — नैतिक, आर्थिक और सामाजिक दृष्टि समाहित।
  • व्यापार-पर संबंध: G7 में रणनीतिक साझेदारी के अनुरूप  बनकर, भारत वैश्विक अर्थशास्त्र का हिस्सा बन रहा है।
  • राजनीतिक संयम: भारत ने पक्षपात से बचते हुए शांति और सहयोग को बढ़ावा दिया—यह नीति की विश्वभर में प्रशंसा हुई जिसे Reuters और BBC ने सराहा।

निष्कर्ष

G7 Summit 2025 ने साबित कर दिया कि:

  • भारत अब सिर्फ कहलाने वाला विकासशील राष्ट्र नहीं, बल्कि गढ़ (Hub) बनाने वाला वैश्विक नेता है।
  • मोदी का संदेश स्पष्ट था—”साझा जिम्मेदारी, शांति और टेक्नोलॉजी का विकास”।
  • कनाडा में ये दो दिन भारत के भविष्य को विश्वपटल पर मजबूती से रखने का मंच बना है।

अब G7 सम्मेलन केवल नीतियाँ तय करने का स्थान नहीं रहा, बल्कि यह भारत की वैश्विक पहचान और विश्वसनीय साझेदारी स्थापित करने की दिशा में एक रणनीतिक क़दम साबित हुआ।

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