कश्मीर का विकास, एक नई रफ्तार
जम्मू-कश्मीर, जो कभी भारत के राजनीतिक विवाद और आतंकवाद (Terrorism) के कारण चर्चा में रहा करता था, अब प्रगति (Development) और संरचना की दृष्टि से नए युग में प्रवेश कर चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20वीं सदी के सपनों को 21वीं सदी की तकनीक और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ साकार करते हुए चिनाब ब्रिज (Chenab Bridge) , अंजी खड्ड ब्रिज और श्रीनगर को जोड़ने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस का उद्घाटन कर एक नई शुरुआत की है।यह सिर्फ पुल और ट्रेन नहीं हैं, बल्कि वह कड़ी हैं जो कश्मीर को विकास, विश्वास और राष्ट्रीय एकता से जोड़ती हैं।

रेल से जुड़े सपनों की शुरुआत
कश्मीर घाटी को रेल नेटवर्क से जोड़ने की कल्पना कोई नई नहीं है। यह सपना ब्रिटिश काल (British Time) से पल रहा था लेकिन दशकों (Decades) तक सिर्फ राजनीतिक वादों में सिमटा रहा। 1990 के दशक में जब उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) की योजना तैयार हुई, तो यह स्पष्ट हो गया कि सरकार इस दिशा में गंभीर है।
2002 में इसकी नींव रखी गई और 2005 में पहला रेलमार्ग बारामूला से काजीगुंड के बीच शुरू हुआ। लेकिन असली चुनौती थी – ऊँचे पर्वतों, दुर्गम घाटियों और संवेदनशील भौगोलिक परिस्थितियों से गुजरते हुए निर्माण को अंजाम देना।
चिनाब ब्रिज दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे पुल
चिनाब नदी पर बना यह आर्च ब्रिज (arch bridge) तकनीकी कौशल का अद्भुत उदाहरण है।
- ऊँचाई: 359 मीटर (एफिल- Eiffel Tower टावर से भी ऊँचा)
- लंबाई: 1315 मीटर
- निर्माण: अफकॉन इंफ्रास्ट्रक्चर (Afcons Infrastructure) और DRDO की साझेदारीलागत: ₹1486 करोड़
विशेषताएँ:
- 260 किलोमीटर प्रति घंटे हवा की रफ्तार को सहने की क्षमता
- 8.0 तीव्रता के भूकंप को झेलने में सक्षम तथा 40 टन के विस्फोटक को सहने के लिए तैयार
- 120 साल की आयु की गारंटी
इस पुल ने कश्मीर को शेष भारत से रेल के माध्यम से स्थायी रूप से जोड़ दिया है। यह पुल न केवल नागरिक आवागमन बल्कि सैन्य लॉजिस्टिक्स के लिहाज़ से भी अहम है।

अंजी खड्ड ब्रिज – भारत का पहला केबल-स्टे रेलवे ब्रिज
जम्मू-कश्मीर के उधमपुर-श्रीनगर सेक्शन में बना अंजी खड्ड पुल देश का पहला ऐसा पुल है जो केबल स्टे तकनीक (cable stay technology) पर आधारित है।
- ऊँचाई: 196 मीटर
- लंबाई: 473.25 मीटर
विशेषताएँ:
- अत्यधिक पवन वेग सहन करने में सक्षम
- अर्धचंद्राकार टावरों से जुड़ा
- 96 केबल्स का संतुलन
- निर्माण में लेजर स्कैनिंग, ड्रोन सर्वे और AI तकनीकों का उपयोग
यह पुल उन क्षेत्रों में बना है जहां भूस्खलन, तेज़ हवाएं और ऊबड़-खाबड़ भूगोल निर्माण को कठिन बना देते थे। इसने एक इंजीनियरिंग की विजय कथा को जन्म दिया।
USBRL परियोजना – कश्मीर के लिए जीवन रेखा
USBRL (Udhampur-Srinagar-Baramulla Rail Link) परियोजना एक रणनीतिक, आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण से अभूतपूर्व योजना है।
- कुल लंबाई: 272 किलोमीटर
- पुलों की संख्या: 943
- सुरंगें: 36, जिनमें सबसे लंबी सुरंग 12.75 किलोमीटर लंबी है
- लागत: ₹43,780 करोड़
- समाप्ति वर्ष: 2025 (पूर्णतः परिचालित)
इस परियोजना से न केवल कश्मीर घाटी बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों के दर्जनों गाँव और कस्बों को भी रेल सुविधा से जोड़ा गया है। यह एक परिवर्तनकारी परियोजना है जो पर्यटकों से लेकर व्यापारियों तक सभी के लिए वरदान है।
वंदे भारत एक्सप्रेस – कश्मीर की नई रफ्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 जून 2025 को श्रीनगर रेलवे स्टेशन से कश्मीर की पहली वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह केवल एक ट्रेन नहीं बल्कि भरोसे, आत्मविश्वास और प्रगति का प्रतीक बन चुकी है।
मुख्य विशेषताएं:
- मार्ग: श्रीनगर से जम्मू के बीच (प्रारंभिक चरण में बारामूला तक)
- स्पीड: 130-160 किमी/घंटा
- डिज़ाइन: सेमी-हाई स्पीड, स्वदेशी तकनीक से बनी
सुविधाएं: Wi-Fi, बायो टॉयलेट्स, GPS बेस्ड इंफॉर्मेशन, सुरक्षा कैमरे, एंटी-क्लाइंब डिब्बे
