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AI-171 विमान अहमदाबाद से टेकऑफ़ के 2 मिनट बाद ही क्यों हुआ

क्रैश? साजिश या तकनीकी चूक?

हादसे की पृष्ठभूमि – टेकऑफ़ के बाद अचानक गिरा विमान

12 जून 2025 को एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171, अहमदाबाद एयरपोर्ट से लंदन के लिए उड़ान भरते ही सिर्फ दो मिनट में ही क्रैश हो गई। यह हादसा मेडिकल कॉलेज हॉस्टल की इमारत पर हुआ, जिसमें 260 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई।

पायलट ने “मायडे कॉल” में कहा था:

“No thrust… Mayday… Mayday!”

इसका मतलब था कि विमान में थ्रस्ट यानी ताक़त या रफ्तार देने वाली शक्ति पूरी तरह खत्म हो चुकी थी।

Courtesy – Amar Ujala

 

दोनों इंजन एक साथ बंद – संयोग या साजिश?

दुर्घटना की सबसे बड़ी रहस्य की बात यह रही कि दोनों इंजन एक साथ बंद हो गए, जो सामान्य परिस्थिति में लगभग असंभव है। इस तरह की घटना को “Rarest of rare” कहा गया।


सवाल ये उठे  – 

  • क्या यह तकनीकी खराबी थी?

  • या कोई साजिशन अड़चन डाली गई?

इन बिंदुओं पर सरकार और विशेषज्ञों ने जांच को “All possible angles including sabotage” की ओर मोड़ दिया।


साजिश की जांच क्यों शुरू हुई?

  • विमान के ब्लैक बॉक्स (CVR और FDR) में शुरूआती संकेत मिले कि कारण सामान्य नहीं था।

  • एक ग्राउंड स्टाफ की संदिग्ध गतिविधि उड़ान से कुछ घंटों पहले CCTV में कैद हुई।

  • कुछ यात्रियों ने उड़ान से पहले अजीब सी गंध महसूस होने की बात कही थी।

  • पायलट पूरी तरह प्रशिक्षित और अनुभवी थे जिससे मानवीय गलतियों की संभावना बेहद कम थी।

इसलिए, अब इसे एक संभावित साजिश (sabotage) के तौर पर भी देखा जा रहा है।

Courtesy – NDTV

 

विमान की तकनीकी स्थिति

AI-171 विमान –

  • Boeing 787 Dreamliner – जो 11 साल पुराना था।

  • इससे पहले भी इसी तरह के Dreamliner विमानों में इंजन फेलियर की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन दोनों इंजन एक साथ बंद होना आश्चर्यजनक बात है।


इससे ये सवाल उठता है कि क्या विमान के Maintenance में कोई चूक हुई थी?

हादसे के बाद की तत्काल कार्रवाई

  • प्रधानमंत्री मोदी स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे।

  • DGCA ने सभी Boeing Dreamliner विमानों की जांच शुरू कर दी।

  • 33 विमानों में से 26 की तकनीकी जांच हो चुकी है।

  • भारत ने ब्लैक बॉक्स को विदेश न भेजते हुए अपने ही जांच केंद्र में जांच का फैसला लिया।

यात्रियों के रिश्तेदारों और जनता की प्रतिक्रिया

  • एकमात्र जीवित यात्री ने बताया कि कैसे सब कुछ कुछ ही सेकंड में खत्म हो गया।

  • कई लोगों ने सवाल उठाए कि तकनीकी जाँच रिपोर्ट पारदर्शी ढंग से क्यों नहीं दी जा रही?

  • मृतकों के परिजनों ने बीमा राशि और जवाबदेही की माँग उठाई।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया – क्या कहा विदेशी एजेंसियों ने?

  • अमेरिका की NTSB, UK की CAA और UN की ICAO ने इस मामले पर गंभीर चिंता जताई।

  • Boeing कंपनी ने बयान दिया कि “हम सहयोग कर रहे हैं”, लेकिन अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं आया।

  • CNN, The Guardian, NYT जैसे बड़े मीडिया संस्थानों ने इसे 2025 का सबसे बड़ा विमान हादसा बताया।

संभावित कारण – 

इस हादसे में निम्नलिखित संभावनाएं सबसे ज्यादा चर्चा में हैं – 

🔸 इंजन फेलियर

  • दोनों इंजन का अचानक बंद हो जाना तकनीकी दृष्टि से लगभग असंभव है।

  • इंजन में जलने के निशान दिखे हैं लेकिन ओवरहीटिंग का कोई संकेत नहीं मिला।

🔸 फ्लैप और गियर सिस्टम की गड़बड़ी

  • हो सकता है टेकऑफ़ के समय फ्लैप ठीक से खुले न हों या गियर में दबाव न बना हो।

  • इससे विमान टेकऑफ़ की ऊँचाई तक नहीं पहुँच पाया।

🔸 ह्यूमन एरर?

  • पायलट अत्यंत अनुभवी थे, फिर भी जांच में यह देखा जाएगा कि कहीं कोई फैसला गलत तो नहीं लिया गया।

🔸 साजिश/तोड़फोड़ (Sabotage)

  • ग्राउंड स्टाफ द्वारा जानबूझकर सिस्टम से छेड़छाड़, फ्यूल में मिलावट, वायरिंग को नुकसान जैसे एंगल भी जांच में शामिल किए गए हैं।

सुधारों का रोडमैप – 

इस हादसे ने भारत में विमानन व्यवस्था को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है। अब जिन सुधारों की आवश्यकता है – 

🔹 सुरक्षा SOP का पुनः निर्धारण

  • टेकऑफ़ से पहले इंजनों की डुअल जांच प्रणाली बनाई जाएगी।

  • पायलट और ग्राउंड स्टाफ के लिए साइकोलॉजिकल स्क्रीनिंग अनिवार्य की जाएगी।

🔹 Predictive Maintenance तकनीक

  • अब विमान की AI आधारित निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे संभावित तकनीकी खराबी पहले ही पता चल सके।

🔹 कर्मियों की प्रशिक्षण प्रणाली में बदलाव

  • ग्राउंड स्टाफ, इंजीनियरिंग टीम और पायलट को हर 6 महीने में री-ट्रेनिंग दी जाएगी।

  • सख्त गाइडलाइंस बनाई जाएंगी कि कैसे हर तकनीकी रिपोर्ट की दो बार पुष्टि हो।

🔹 जांच और जवाबदेही

  • दुर्घटना जांच के लिए निर्भरता विदेशी एजेंसियों पर नहीं, भारत अपनी प्रोफेशनल टीम और टेक्नोलॉजी विकसित करेगा।

  • सभी डाटा, ब्लैक बॉक्स और रिकॉर्डिंग 30 साल तक संग्रहित किए जाएंगे।

निष्कर्ष

AI‑171 हादसा न सिर्फ एक भयानक त्रासदी है बल्कि यह हमें यह याद दिलाता है कि सुरक्षा कभी विकल्प नहीं होती, यह एक आवश्यकता है। इस दुर्घटना से जो सबक मिलें, उन्हें ईमानदारी से अपनाना होगा, ताकि भविष्य में हम फिर ऐसी दुर्घटनाओं को टाल सकें।

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