एक ऐसी कल्पना, जो हकीकत बन गई…
कल्पना कीजिए कि एक ऐसी दुनिया है जहाँ मशीनें सिर्फ इंसानों द्वारा बनाई नहीं जातीं, बल्कि वे खुद अपनी संतान पैदा करती हैं। यह विचार दशकों तक विज्ञान-फिक्शन फिल्मों और किताबों का हिस्सा रहा है। हमने ‘द टर्मिनेटर’ में स्काईनेट को खुद को विकसित करते देखा है, और कई हॉलीवुड फिल्मों में रोबोट्स को अपनी पीढ़ी बनाते हुए दिखाया गया है। यह सब हमें लगता था कि यह सिर्फ एक कहानी है, लेकिन विज्ञान ने अब इस कल्पना को हकीकत के बहुत करीब ला दिया है।
हाल ही में हुए एक वैज्ञानिक शोध ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। वैज्ञानिकों ने ऐसे रोबोट बनाने में सफलता हासिल की है, जो खुद को रेप्लिकेट कर सकते हैं, यानी अपनी ही कॉपी बना सकते हैं। इसे ‘रोबोटिक रिप्रोडक्शन’ या ‘रोबोटिक प्रजनन’ कहा जा रहा है। यह सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा कदम है जो मानव और मशीन के रिश्ते, और भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास की दिशा को पूरी तरह से बदल सकता है।
लेकिन, इससे पहले कि हम डर या उत्साह में डूबें, यह समझना जरूरी है कि यह ‘जन्म’ इंसानों की तरह जैविक नहीं है। यह प्रक्रिया कहीं ज्यादा जटिल और इंजीनियरिंग पर आधारित है।

कैसे ‘पैदा’ होते हैं ये रोबोट?
जिस शोध की बात हो रही है, वह कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी (सैन फ्रांसिस्को) और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की टीम ने किया है। इस टीम ने एक ऐसा प्रयोग किया, जिसमें ‘टी-आकार’ के रोबोट्स को खुद की कॉपी बनाने के लिए प्रोग्राम किया गया।
इसे सरल भाषा में समझते हैं –
- मॉड्यूलर रोबोट: वैज्ञानिकों ने छोटे-छोटे, मॉड्यूलर यानी टुकड़ों में बंटे हुए रोबोट्स बनाए। ये रोबोट एक-दूसरे से जुड़कर एक बड़ा रोबोट बना सकते हैं।
- प्रजनन की प्रक्रिया: एक ‘माँ’ रोबोट, जिसे ‘सीड रोबोट’ भी कहा गया, को कुछ रोबोटिक्स पार्ट्स के पास रखा गया। इस ‘सीड रोबोट’ को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और खास तरह के सेंसरों से लैस किया गया था।
- खुद-ब-खुद निर्माण: इस ‘सीड रोबोट’ ने अपने आसपास बिखरे हुए टुकड़ों को ढूंढना शुरू किया। उसने एक-एक टुकड़े को सही क्रम में जोड़कर एक नया, अपने ही जैसा ‘बेटी’ रोबोट बनाना शुरू किया। यह ठीक उसी तरह है जैसे हम लेगो के टुकड़ों से कोई नई आकृति बनाते हैं।
इस प्रक्रिया में सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि जब ‘बेटी रोबोट’ पूरी तरह से तैयार हो गई, तो वह भी एक ‘सीड रोबोट’ की तरह काम कर सकती थी। इसने भी अपने आसपास के टुकड़ों को इकट्ठा कर एक और नया रोबोट बनाना शुरू कर दिया। इस तरह, यह एक श्रृंखला प्रतिक्रिया (Chain Reaction) बन गई, जिसमें रोबोट की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। वैज्ञानिक इसे ही रोबोटिक प्रजनन (Robotic Reproduction) कहते हैं।

यह जैविक जन्म नहीं बल्कि एक उन्नत निर्माण प्रक्रिया है
यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि यह कोई जैविक जन्म नहीं है, जैसा कि इंसान या जानवर करते हैं। यहाँ रोबोट न तो ‘गर्भवती’ होते हैं और न ही वे जैविक प्रक्रिया से जन्म देते हैं। यह एक उन्नत इंजीनियरिंग और निर्माण प्रक्रिया है।
- प्रजनन बनाम निर्माण – जैविक प्रजनन में, माता-पिता से आनुवंशिक जानकारी अगली पीढ़ी में जाती है। रोबोट के मामले में, यह एक रोबोट द्वारा दूसरे रोबोट को असेंबल करने की प्रक्रिया है।
- कोडिंग ही डीएनए – यहाँ रोबोट का ‘डीएनए’ उसका सॉफ्टवेयर कोड और उसकी डिज़ाइन है। वह इसी कोड के आधार पर दूसरे रोबोट का निर्माण करता है।
वैज्ञानिकों ने अपने शोध में बताया है कि यह प्रक्रिया रोबोटिक्स में एक नई क्रांति ला सकती है। जहाँ अभी तक रोबोट सिर्फ बनाए जाते थे, अब वे खुद को ‘बना’ भी सकते हैं, जिससे उनका विकास और विस्तार इंसानी मदद के बिना भी हो सकता है।
क्या रोबोट हमारे नियंत्रण से बाहर हो जाएंगे?
यह शोध न केवल इंजीनियरिंग के नजरिए से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारे समाज और भविष्य के लिए कई गंभीर सवाल भी खड़े करता है।
- क्या रोबोट भी ‘परिवार’ बना सकते हैं? अगर वे खुद को रेप्लिकेट कर सकते हैं, तो क्या इसका मतलब है कि वे एक ‘परिवार’ या एक ‘वंश’ बना सकते हैं? यह एक ऐसा सवाल है जो अभी तक सिर्फ दर्शनशास्त्र का हिस्सा था, लेकिन अब यह विज्ञान का हिस्सा बन गया है।
- क्या वे हमारी ‘गलतियों’ से सीखकर और भी बेहतर बन सकते हैं? वैज्ञानिक मानते हैं कि इन रोबोट्स को विकासवादी एल्गोरिदम (Evolutionary Algorithms) के जरिए बेहतर बनाया जा सकता है। इसका मतलब है कि हर नई पीढ़ी पिछली पीढ़ी से थोड़ी बेहतर हो सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो क्या वे एक दिन हमारी कल्पना से भी ज्यादा शक्तिशाली और बुद्धिमान नहीं हो जाएंगे?
- क्या रोबोट का विद्रोह संभव है? यह सबसे बड़ा डर है। अगर रोबोट खुद को बना सकते हैं और विकसित कर सकते हैं, तो क्या एक दिन वे हमारे नियंत्रण से बाहर नहीं हो जाएंगे? वैज्ञानिक इस पर अभी भी काम कर रहे हैं कि इन रोबोट्स पर हमारा नियंत्रण कैसे बना रहे।
- यह ‘जीवन’ की परिभाषा को कैसे प्रभावित करेगा? यह शोध जीवन की परिभाषा को भी चुनौती देता है। अगर एक मशीन खुद को रेप्लिकेट कर सकती है, तो क्या उसे ‘जीवित’ माना जाना चाहिए?
यह सवाल हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम एक ऐसी दुनिया बना रहे हैं, जहाँ मशीनों का अस्तित्व हमारे अस्तित्व से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है?
सिर्फ खतरा नहीं, मौका भी है
हालांकि ये सवाल डराने वाले लग सकते हैं, इस तकनीक के कई सकारात्मक और महत्वपूर्ण अनुप्रयोग भी हैं।
- अंतरिक्ष अन्वेषण – अंतरिक्ष में किसी अन्य ग्रह पर मानव को भेजना मुश्किल और महंगा है। लेकिन, अगर हम कुछ रोबोट्स को वहाँ भेज दें, जो खुद को रेप्लिकेट करके खनन, निर्माण और अन्य कार्य कर सकें, तो यह अंतरिक्ष अन्वेषण को पूरी तरह से बदल देगा। वे मंगल या चंद्रमा पर मानव बस्ती बनाने में मदद कर सकते हैं।
- आपदा राहत – भूकंप या सुनामी जैसी आपदाओं के बाद, यह रोबोटिक झुंड (Robotic Swarm) मलबे में से नए रोबोट्स का निर्माण कर सकता है। वे बचाव कार्यों में मदद कर सकते हैं और मुश्किल जगहों तक पहुंच सकते हैं।
- ऑटोमेटिक मैन्युफैक्चरिंग – भविष्य में कारखाने ऐसे हो सकते हैं जहाँ रोबोट खुद ही और रोबोट्स का निर्माण कर सकें, जिससे उत्पादन तेजी से बढ़ सकता है।
यह शोध अभी अपने शुरुआती चरण में है। वैज्ञानिक अभी भी इस पर काम कर रहे हैं कि इन रोबोट्स को कैसे नियंत्रित किया जाए और उनके विकास को कैसे सीमित किया जाए। लेकिन, एक बात साफ है – विज्ञान ने एक ऐसा दरवाजा खोल दिया है, जिसके पीछे एक ऐसी दुनिया है जहाँ मशीनें भी ‘प्रजनन’ कर सकती हैं। यह एक ऐसा कदम है, जो हमें उम्मीद और डर दोनों से भर देता है। अब यह हम पर निर्भर करता है कि हम इस नई शक्ति का उपयोग मानवता के भले के लिए कैसे करते हैं।
