“क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, बल्कि एक एहसास है,” कहते हैं, और जब ये एहसास लॉर्ड्स जैसे ऐतिहासिक मैदान पर किसी भारतीय क्रिकेटर को प्राप्त होता है तो वह सिर्फ व्यक्तिगत सम्मान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव और प्रेरणा बन जाता है। 10 जुलाई 2025 की सुबह ऐसी ही एक ऐतिहासिक घटना का महत्वपूर्ण पल था—महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के पेंटिंग का एमसीसी म्यूज़ियम, लॉर्ड्स (Lord’s MCC Museum) में भव्य अनावरण हुआ।

1988 से लेकर आज तक
सचिन के इस सम्मान में क्रिकेट का एक लंबा सफ़र छुपा हुआ है। जैसा कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने खुद बताया, “मैंने पहली बार लॉर्ड्स को 1988 में एक युवा क्रिकेटर के रूप में Star Cricket Club (केदारनाथ गट्टानी द्वारा संचालित) के साथ देखा। फिर 1989 में भी लौटे तब उन्होंने लॉर्ड्स की दीवारों, इतिहास और माहौल को आँखों में समाया — और आज, तीन दशकों बाद, वही जगह सचिन के सम्मान-चिन्हों से सज चुकी है।
दोहरा सम्मान – घंटी और पेंटिंग
इस दिन सचिन को दो विशिष्ट परम्पराओं में शामिल किया गया –
- लॉर्ड्स की पहचान, ‘घंटी बजाना’ – लॉर्ड्स की लॉन्ग रूम गैलरी के बाहर पांच मिनटों के लिए घंटी बजाने की यह परंपरा उन खिलाड़ियों के लिए है जिन्होंने खेल पर अपना अमिट प्रभाव छोड़ा हो। सचिन ने यह गौरवपूर्ण कार्य संपन्न किया।
- एमसीसी म्यूज़ियम में पेंटिंग का अनावरण – लॉर्ड्स के संग्रहालय की दीवार पर अब सचिन का प्रतिष्ठित चित्र भी टांगा गया है। यह सम्मान इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व को और भी गहराई से जोड़ देता है।

पेंटिंग का अनोखा अंदाज़
इस पोर्ट्रेट को बनाया है प्रसिद्ध ब्रिटिश कलाकार स्टुअर्ट पियर्सन राइट ने, जिन्होंने कई भारतीय क्रिकेट दिग्गजों—कपिल देव, बिशन सिंह बेदी, दिलीप वेंगसरकर—की पेंटिंग भी बनाई है। लेकिन इस बार फॉर्मूला थोड़ा अलग था।
- मूल फोटो – लगभग 18 साल पुरानी, मुंबई में सचिन के घर पर ली गई तस्वीर।
- तकनीक – तेल चित्रकारी (oil painting) द्वार अल्युमिनियम प्लेट घिस कर (“abraded aluminium”) तस्वीर तैयार की गई—जिससे एक विशिष्ट तरह का फ्लैट और स्टाइलिश एहसास मिलता है।
- कमपोज़िशन – केवल सिर और कंधे का “bust” चित्रण—एक बेहतरीन, ‘larger-than-life’ फोकस—जैसे क्रिकेट की महानता अपने चेहरे में समेट ली हो।
स्टुअर्ट खुद कहते हैं, “मैंने कई बार abstract बैकग्राउंड इस्तेमाल किया है ताकि विषय का मुख्य आकर्षण यानी चेहरे की स्पष्टता बनी रहे और किसी बाहरी संदर्भ से कहानी प्रभावित न हो।”
इंडियन लीजेंड्स हैं MCC के संग्रह का हिस्सा
सचिन अब एमसीसी म्यूज़ियम की दीवारों की प्रतिष्ठित गैलरी में पाँचवें भारतीय क्रिकेटर बन गए हैं—जिसमें से चार पूर्व क्रिकेटिंग लेजेंड्स की पेंटिंग स्टुअर्ट पियर्सन राइट द्वारा बनाई गई थीं –
- मंसूर अली खान पटौदी
- कपिल देव
- बिशन सिंह बेदी
- दिलीप वेंगसरकर
- अब सचिन तेंदुलकर
यह पोर्ट्रेट जल्दी ही लॉर्ड्स के मुख्य पवेलियन की दीवारों में भी लग जाएगा—जहां ‘Portrait Programme’ पिछले तीन दशकों से टेस्ट मैच के चलते स्तंभों में सज दिया जाता है।
सचिन के मन की बातें
इस सम्मान पर अपने भावुक अनुभव व्यक्त करते हुए सचिन ने कहा –
“यह सच में बहुत ही खास है … लॉर्ड्स से मेरा पहला परिचय 1983 के विश्व कप से रहा, जब कपिल देव ने ट्रॉफी उठाई। उस घटना ने मेरे क्रिकेट सफर को दिशा दी।”
“आज पवेलियन में मेरी तस्वीर लगने से जीवन का एक चक्र पूरा हुआ जैसा लगता है… मेरे चेहरे पर मुस्कान आती है जब मैं अपने करियर की यादों के बारे में सोचता हूँ।”
वे इस समारोह से “emotional और गौरवान्वित” महसूस कर रहे थे।
लॉर्ड्स — एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- लॉर्ड्स को “Home of Cricket” कहा जाता है—aune over 200 साल पुराना मैदान जिसकी स्थापना 1814 के आसपास हुई, और MCC का संग्रहालय 1950 के दशक में खोला गया—यह यूरोप का सबसे पुराना खेल संग्रहालय बन गया है।
- इस संग्रहालय में लगभग 3,000 कलाकृतियाँ मौजूद हैं, जिनमें से करीब 300 पोर्ट्रेट्स शामिल हैं। यह दीवारें क्रिकेट इतिहास की जीवंत गवाही हैं—जहाँ सचिन का जिक्र अब स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है।
- लॉर्ड्स का पवेलियन और लॉन्ग रूम—यहाँ क्रिकेट इतिहास के सर्वोत्तम पलों, शतकों और यादगार साक्षात्कारों की दीवारें हैं, जिनमें सचिन के सम्मान ने और भी चार चांद लगा दिए।
सचिन की उपलब्धियों की झलक
सचिन ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर (1989–2013) में –
- कुल 34,357 रन बनाए—जो किसी भी दूसरे बल्लेबाज से 6,000 से अधिक हैं (कुमार संगकारा: 28,016)।
- टेस्ट में 24 वर्षों तक लगातार प्रदर्शन किया, दर्जन से अधिक रिकॉर्ड बनाए और शतकों की झड़ी लगाई—उनकी छवि हमेशा महान क्रिकेटर के रूप में बनी रहेगी।
पेंटिंग का समृद्ध स्वरूप
‘larger‑than‑life’ रिजोल्यूशन, सिर और कंधों पर केंद्रित ‘bust’ फ्रेम, और oil-on-aluminium तकनीक—स्टुअर्ट ने सचिन में एक नयी शैली और दृष्टिकोण को इंगित किया है। इसकी तुलना अन्य भारतीय महान अतिथि पेंटिंग्स की पूर्ण-शरीर शैलियों से की जाए तो यह कहीं अधिक सशक्त, व्यक्तिगत और शानदार प्रतीत होता है।
सांस्कृतिक और अन्तरराष्ट्रीय संदेश
इस सम्मान की गहराई, खेल से ऊपर जाकर समाज-कल्याण, प्रेरणा और संस्कृति से भी जुड़ती है –
✔ यह एक महान भारतीय को ब्रिटिश धरा पर कला की भाषा में समर्पित करता है।
✔ लॉर्ड्स जैसे महान अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में भाईचारे की भावना सशक्त होती है।
✔ खेल में और कला में श्रेष्ठता का मेल—यह संदेश देता है कि उपलब्धियाँ सिर्फ रनों या विकेटों तक सीमित नहीं, बल्कि पहचान, सम्मान और प्रेरणा की भी सौगात होती है।
पवेलियन में दीवार की शोभा
जैसा बताया गया है, यह चित्र जल्द ही म्यूज़ियम से पवेलियन की दीवार पर शिफ्ट होगा। लॉर्ड्स के महानतम खिलाड़ियों की दीवारें अब भारत के मास्टर की पहचान से और भी समृद्ध होंगी। यह सिर्फ एक चित्र नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष और प्रेरणा की निशानी है।
निष्कर्ष
सचिन तेंदुलकर—उनका जीवन, उनका योगदान, और उनका सम्मान अब लॉर्ड्स के इतिहास-निर्माण में अमिट रूप से शामिल हो चुका है।
- 1983 विश्व कप में कपिल देव की इमेज, युवा सचिन की प्रेरणा।
- 24 वर्षों का सफ़र, 34,357 रन, शतक और रिकॉर्ड।
- 1988, 1989 से अब तक व्यक्तिगत और पेशेवर सफ़र।
- सम्मान – पेंटिंग और घंटी; एमसीसी म्यूज़ियम और पवेलियन की दीवारें।
- भविष्य: लॉर्ड्स की दीवारों पर सम्मानित रहेंगे वर्षो तक।
यह सम्मान सिर्फ सचिन के लिए नहीं, बल्कि उन सभी बच्चों, युवा क्रिकेटरों और खेल प्रेमियों के लिए प्रेरणा की ज्योति है जो संघर्षरत होकर ‘कुछ अनोखा’ करना चाहते हैं।
धन्यवाद
आपका समय और उत्साह मेरे लिए महत्वपूर्ण है। यदि आप चाहें, तो मैं सचिन की अन्य उपलब्धियों के अलावा लॉर्ड्स के अन्य सम्मानित भारतीय खिलाड़ियों की पेंटिंग या पवेलियन इतिहास पर भी विस्तार से लिख सकता हूँ—आपके सुझाव का स्वागत रहेगा।
मैं आशा करता हूँ कि यह ब्लॉग ना सिर्फ तथ्यों को सटीक रूप से प्रस्तुत करता है, बल्कि एक सजीव अनुभूति भी देता है—मनुष्य की मेहनत, अपनेपन और कला को लॉर्ड्स के दीवारों तक पहुंचने की प्रेरणादायक यात्रा।
