ख्वाबों की शुरुआत उस दिन हुई जब लखनऊ के एक आम बच्चे ने आसमान की ऊँचाई को देखा। तब शायद ही उसने सोचा होगा कि एक दिन वह सच में अंतरिक्ष का सफ़र तय करेगा। एक शिक्षक के बेटे के रूप में पढ़ने वाला यह लड़का, शुभांशु शुक्ला, अब वो नाम बन चुका है जिसने Axiom‑4 मिशन के ज़रिए ISS (International Space Station) तक की यात्रा की।

बचपन में शुरू हुई उड़ान
शुभांशु ने लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल से शिक्षा ली। तीसरी कक्षा में ही उन्होंने आजीवन दोस्त कामना से दोस्ती की, जो बाद में उनकी जीवनसंगीनी बनीं।
इसके बाद NDA, फिर वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में सेवा—यह सफ़र दिखाता है कि बचपन के सपने भी मेहनत से हकीकत बनते हैं।
दो हज़ार घंटे से ज़्यादा उड़ान का अनुभव, तेजस, सुखोई जैसे विमानों में उड़ान भरा, और तकनीकी महारत—यह सब शुभांशु को Gaganyaan मिशन और अंततः ISS तक ले गया।
Axiom‑4
Axiom Space, NASA और SpaceX की साझेदारी में 25 जून, 2025 को Falcon‑9 रॉकेट ने शुभांशु, PEGGY WHITSON (USA), SŁAWOSZ UZNAŃSKI (Poland) और TIBOR KAPU (Hungary) को ISS की ओर भेजा।
यह सिर्फ मिशन नहीं—एक नया इतिहास था, जहाँ चार देश एक मंच पर खड़े थे।
तकनीकी देरी
मिशन की शुरुआत असल में 10 जून के आस-पास थी, लेकिन फ्यूल लीक, मौसम की उलझन और ISS के ज़्वेज़्दा मॉड्यूल में पाई गई एयर लीक को ठीक करने में 2–3 हफ्ते लग गए।
पर यही इंतज़ार मिशन को सुरक्षित और मजबूत बनाकर स्पेस में गया।
देश को संदेश—“Namaskar from space!
“Namaskar from space… Tiranga याद दिला रहा है कि आप सभी मेरे साथ हैं”—ISS से शुभांशु का यह संदेश सुनते ही करोड़ों दिलों में गर्व भर आया।
मधुर हिंदी में यह उद्घोष, भारत-प्रेम और अंतरिक्ष की यात्रा का संगम था।

कैप्सूल से मिशन तक
Launch के लगभग 28 घंटे बाद, Dragon कैप्सूल ने 26 जून की शाम Harmony मॉड्यूल से डॉकिंग की। “Soft docking” 4:02 PM IST पर हुआ और “Hard docking” 4:16 PM तक पूरी हुई — ISS में प्रवेश का पल ऐसा था कि ISS के सात सदस्यों ने झट से हग कर स्वागत किया।
वह दृश्य था—जहाँ चारों ने एक साथ खड़े हो कर फोटो ली और “इंटरस्टिशियल ड्रिंक” का आनंद लिया।
14 दिन, 60+ प्रयोग
ISS में शुभांशु और उनकी Crew के लिए दो हफ्तों में 60+ वैज्ञानिक प्रयोग होना तय था, जिसमें भारतीय नेतृत्व वाले 7 प्रयोग भी शामिल हैं:
- माइक्रोग्रैविटी में पौधों का विकास
- मानव की मांसपेशियों और दृष्टि की जाँच
- माइक्रोबियल स्टडीज
- स्पेस न्यूट्रिशन और Earth observation
- स्पेस microalgae पर शोध, जो भविष्य की अंतरिक्ष की खेती में उपयोगी होगा।
देश का गौरव और भावनाएँ
- PM मोदी, सांसद और नेता—सबने ट्वीट कर बधाई दी ।
- लखनऊ त्रिवेणी नगर में खुशी का माहौल: स्कूल, घर, गली—हर तरफ तिरंगा दिखा।
Joy नाम का तोहफ़ा
Shubhanshu ने एक soft-toy “Joy” (स्वान) को साथ लिया—जैसे Yuri Gagarin नेspace में खिलौना लिया था।
साफ था—यह सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि आत्मा की यात्रा थी।
देशों के लिए बड़ा क्षण
Poland और Hungary के लिए भी यह पहला अवसर था; तीन देशों ने एक साथ ISS की यात्रा की।
इससे साबित हुआ कि private space era में एक साथ तीन देशों का मिलना और सहयोग बढ़ाना सफलता की ओर संकेत करता है।
भविष्य की राह
यह मिशन सिर्फ अभी की बात नहीं—यह Gaganyaan के लिए डेटा, अनुभव और प्रशिक्षण देगा।
Axiom की इस सफलता से ISS के बाद private space station संभव होंगे—जहां भारत भी शामिल हो सकता है।
निष्कर्ष
शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में जाना—यह सिर्फ यात्रा नहीं थी, यह भारत के सपनों की उड़ान थी।
140 करोड़ लोगों के सपने साथ लिए,
नए वैज्ञानिक प्रयोगों को हाथ में थामा,
भारत का नाम अंतरिक्ष में चमका दिया।
इससे यह एहसास होता है—निर्णय लें, मेहनत करें, भावनाओं को जगाएं, और इतिहास लिख जाएँ!
