एक प्यारी शुरुआत जो डरावने मोड़ पर खत्म हुई
इंदौर की सोनम और राजा की शादी (Marriage) 11 मई 2025 को धूमधाम से हुई थी। दोनों परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई थी, और जल्द ही नवविवाहित (Newly Married Couple) जोड़ा अपने हनीमून पर निकल पड़ा – गंतव्य था पूर्वोत्तर भारत का खूबसूरत और शांत राज्य मेघालय, जहां बादलों का शहर शिलॉन्ग और वहां की हरियाली नवविवाहितों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं।
लेकिन किसी को अंदेशा नहीं था कि यह हनीमून ट्रिप एक ऐसे अपराध की ओर बढ़ रही है, जो पूरे देश को झकझोर देगा। 23 मई को अचानक खबर आती है कि सोनम लापता हो गई है, और उसका पति राजेश यानी राजा संदिग्ध परिस्थियों में लापता है।
यह सिर्फ एक गुमशुदगी का मामला नहीं था, बल्कि इसके पीछे प्रेम, धोखा, षड्यंत्र और हत्या की भयावह कहानी छुपी थी। आज हम इस लेख में उसी घटना की हर परत को खोलेंगे, जो शिलॉन्ग से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में खत्म हुई।

शादी से शिलॉन्ग तक सपनों की शुरुआत
राजा पेशे से एक बिज़नेस मैन था जबकि सोनम इंदौर के एक कॉलेज से ग्रेजुएट थी और अपने पिता की कंपनी में HR के रूप में कार्यरत थी। दोनों की शादी पारंपरिक अंदाज में हुई थी और हर किसी को लग रहा था कि यह जोड़ा एक सुंदर जीवन की शुरुआत करने जा रहा है।
20 मई को दोनों शिलॉन्ग पहुंचे। सोशल मीडिया पर दोनों की कुछ तस्वीरें भी वायरल हुई थीं जिसमें वो पर्यटकों की तरह घूमते और मुस्कुराते नजर आ रहे थे। लेकिन 23 मई को अचानक खबर आती है कि सोनम शिलॉन्ग से गायब हो गई है। राजा ने पुलिस को सूचना दी थी कि सोनम वॉटरफॉल के पास अचानक लापता हो गई।
पुलिस ने जांच शुरू की, लेकिन जल्द ही मामला उलझने लगा।

गुमशुदगी या रची गई साजिश?
जब पुलिस ने पूछताछ शुरू की तो सबसे पहला सवाल यही उठा – क्या सोनम वास्तव में लापता हुई थी या ये एक रची हुई साजिश थी?
23 मई को सोनम के लापता होने की खबर आते ही SDRF और NDRF की टीमों को सर्च ऑपरेशन में लगाया गया। ड्रोन, स्निफर डॉग्स, और दर्जनों जवानों ने दिन-रात जंगलों और झरनों की तलाशी ली। सोनम के परिजन भी इंदौर से शिलॉन्ग पहुंचे।
लेकिन पांच दिन बाद जब सोनम की लोकेशन ट्रेस हुई तो वो शिलॉन्ग से सैकड़ों किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में पाई गई। ये एक ऐसा मोड़ था जिसने पुलिस और जनता दोनों को चौंका दिया।
गाजीपुर में सोनम – डरी हुई या चालाक?
गाजीपुर में सोनम एक ढाबे पर काम कर रहे एक व्यक्ति से मोबाइल मांग कर अपने भाई से संपर्क करती है। वह खुद को बेहद डरी हुई, पीड़ित और घबराई हुई बताती है। स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आती है और उसे हिरासत में लेकर अस्पताल और बाद में महिला सुरक्षा केंद्र भेजा जाता है।
शुरुआत में सोनम का कहना था कि वो किसी हादसे में फंस गई थी और किसी ने उसे अगवा किया।
एक चौंकाने वाली साजिश – प्रेमी, पैसा और प्लानिंग
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि सोनम का इंदौर के ही रहने वाले राज कुशवाहा नामक युवक से अफेयर चल रहा था। पुलिस रिकॉर्ड्स के मुताबिक शादी के बाद भी दोनों के बीच फोन और चैट के माध्यम से लगातार संपर्क बना हुआ था।
सोनम ने अपने पति राजा की हत्या की पूरी साजिश रची थी। आरोप है कि उसने हनीमून ट्रिप के बहाने राजा को मेघालय बुलाया और फिर तीन भाड़े के हत्यारों के साथ मिलकर उसे मारने का प्लान बनाया।
बड़ी बात यह थी कि सोनम ने हत्यारों को पैसे देने के लिए खुद अपने खाते से ₹9 लाख से ज्यादा निकाले थे। यह सारी बातें CCTV, बैंक स्टेटमेंट्स और कॉल डिटेल्स से सामने आईं।
हत्या की रात – क्या हुआ था उस दिन?
23 मई की शाम को राजा और सोनम साथ में घूमने निकले। पुलिस को CCTV फुटेज मिले जिसमें दोनों को वॉटरफॉल की ओर जाते हुए देखा गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, वहीं सोनम ने पहले से मौजूद भाड़े के हत्यारों को लोकेशन दी थी। राजा को पहले से कुछ शक नहीं था और जब वो झरने के किनारे पहुंचा, तभी तीन युवकों ने मिलकर उस पर धारदार हथियार से हमला किया।
राजा की हत्या बेहद नृशंस तरीके से की गई। उसकी बॉडी को फॉल्स के नीचे फेंक दिया गया और जेवर व अन्य सामान गायब कर दिए गए। घटना के बाद आरोपी वहां से फरार हो गए और सोनम अपने प्लान के अनुसार वहां से निकल गई।
आरोपी कौन हैं – हत्या के किरदारों की पहचान
मेघालय पुलिस ने जांच में चार मुख्य आरोपियों को पकड़ा:
- राज कुशवाहा – इंदौर का युवक, सोनम का कथित प्रेमी।
- अक्षय राजपूत – उत्तर प्रदेश का निवासी, हत्या में शामिल भाड़े का हत्यारा।
- विशाल चौहान – इंदौर निवासी, अपराध में सहयोगी भूमिका।
- आनंद कुर्मी – मध्यप्रदेश के सागर का रहने वाला, प्लानिंग में शामिल।
पुलिस ने इनके पास से मोबाइल, नकदी और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए हैं।
सोशल मीडिया और जन भावनाएं
सोनम-राजा केस ने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया है। ट्विटर, इंस्टाग्राम और रेडिट पर लोग इस केस को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोग इसे ’21वीं सदी का डार्क रोमांस’ बता रहे हैं तो कुछ इसे ‘लव-क्राइम ट्रैंगल’ का नाम दे रहे हैं।
इंदौर और मेघालय के लोग खासकर इस केस को लेकर स्तब्ध हैं क्योंकि ये केस दो अलग-अलग समाजों को जोड़ता है। सोशल मीडिया पर लोगों ने सोनम के लिए कड़ी सजा की मांग की है। कई लोगों ने कहा कि अगर ये षड्यंत्र साबित होता है तो इसे rarest of rare में गिना जाना चाहिए।
मनोवैज्ञानिक विश्लेषण – क्या प्रेम इतना अंधा हो सकता है?
इस पूरे केस ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या प्रेम और व्यक्तिगत इच्छाएं इतनी मजबूत हो सकती हैं कि कोई व्यक्ति जीवन साथी की हत्या तक की साजिश कर सके?
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, कुछ मामलों में व्यक्ति अत्यधिक भावनात्मक अस्थिरता और लालच की स्थिति में गलत फैसले ले सकता है। सोनम का केस अगर सच में साजिश है, तो यह हमारे समाज में बढ़ती भावनात्मक असंतुलन और स्वार्थ की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
पुलिस जांच की चुनौतियाँ
इस केस की जांच में पुलिस के सामने कई तकनीकी और भौगोलिक चुनौतियाँ थीं। एक तो अपराध का स्थान एक दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्र था, दूसरा आरोपी एक से अधिक राज्यों में फैले हुए थे। मेघालय, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश पुलिस के बीच तालमेल बैठाना भी एक बड़ा काम था।
डिजिटल फॉरेंसिक, बैंक रिकॉर्ड, GPS ट्रेसिंग, और कॉल रिकॉर्डिंग की मदद से पुलिस ने क्रॉस स्टेट ऑपरेशन को सफल बनाया। लेकिन इतना सब होते हुए भी, आरोपी इतने लंबे समय तक बचते रहे, यह खुद में जांच एजेंसियों के लिए सोचने का विषय है।
समाज और परिवार की प्रतिक्रिया
राजा के माता-पिता और परिवार इस घटना से पूरी तरह टूट गए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी बेटी की तरह सोनम को अपनाया था और कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह उनके बेटे की जान ले सकती है।
वहीं सोनम के परिवार का दावा है कि वह निर्दोष है और उसे झूठे केस में फंसाया गया है। समाज में भी दो धाराएं बन गई हैं – एक पक्ष उसे दरिंदा मानता है, तो दूसरा उसकी मानसिक स्थिति पर सवाल उठाकर सहानुभूति जताता है।
मीडिया की भूमिका और जिम्मेदारी
इस केस में मीडिया की भूमिका शुरू से ही प्रभावशाली रही है। लेकिन कई चैनलों द्वारा सनसनी फैलाना, व्यक्तिगत जीवन की जानकारी सार्वजनिक करना और अंधाधुंध रिपोर्टिंग ने कई बार मामले को भटकाया भी।
हालांकि, यह भी सच है कि अगर मीडिया सक्रिय न होती तो शायद यह केस दबा दिया जाता या सही दिशा में जांच नहीं हो पाती। यह केस हमें मीडिया की शक्ति और उसकी नैतिक जिम्मेदारियों दोनों की याद दिलाता है।
भविष्य की दिशा – न्याय, सबक और समाज
इस केस में अब कानूनी कार्यवाही शुरू हो चुकी है। कोर्ट में लंबी सुनवाई होगी और साक्ष्य के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। लेकिन यह केस आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक बड़ा सबक छोड़ता है – कि रिश्तों में ईमानदारी, विश्वास और मानसिक स्थिरता कितनी ज़रूरी है।
यह घटना यह भी दर्शाती है कि युवाओं को भावनात्मक शिक्षा, साइबर जागरूकता और मानसिक परामर्श की कितनी ज़रूरत है। यह सिर्फ एक हत्या नहीं थी, यह समाज की उस कमी का आईना था जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।
निष्कर्ष
सोनम और राजा की कहानी एक सामान्य विवाह से शुरू होकर अपराध की वीभत्सता तक पहुँचती है। एक ऐसा मोड़ जिसमें एक नवविवाहिता, अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने पति की हत्या करती है – वह भी शिलॉन्ग जैसे दूरस्थ स्थल पर।
यह केस उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो रिश्तों को सिर्फ भावना से नहीं, स्वार्थ और लालच से देखते हैं। न्याय व्यवस्था इस केस में क्या फैसला करती है यह तो समय बताएगा, लेकिन समाज को इससे ज़रूर सीख लेनी चाहिए – कि रिश्तों की नींव भरोसे पर टिकी होती है, छल और षड्यंत्र पर नहीं।
