भूमिका
2024 पेरिस ओलंपिक (2024 Peris Olympic) में अल्जीरिया की मुक्केबाज़ इमान खलीफ ने महिलाओं की वेल्टरवेट (66 किग्रा) श्रेणी में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। लेकिन इस उपलब्धि के बाद उनकी लैंगिक पहचान को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जिसने खेल जगत में हलचल मचा दी। एक भारतीय लैब से लीक हुई रिपोर्ट के अनुसार, खलीफ के अंदर पुरुषों के XY क्रोमोसोम हैं, जिससे उनकी महिलाओं की श्रेणी में भागीदारी पर सवाल उठे हैं।

विवाद की शुरुआत
मार्च 2023 में, नई दिल्ली स्थित डॉ. लाल पैथलैब्स (Dr. Lal Path Labs) ने खलीफ का क्रोमोसोम परीक्षण किया, जिसमें उनके पास XY क्रोमोसोम पाए गए। इस रिपोर्ट के आधार पर, उन्हें 2023 महिला विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए उन्हें 2024 पेरिस ओलंपिक में महिलाओं की श्रेणी में भाग लेने की अनुमति दी।
IOC का रुख
IOC ने डॉ. लाल पैथलैब्स की रिपोर्ट को “रूसी दुष्प्रचार” बताते हुए खारिज कर दिया। उनका कहना था कि यह रिपोर्ट रूसी अधिकारियों द्वारा खलीफ की छवि खराब करने के लिए फैलाई गई है। इसके बावजूद, खलीफ ने पेरिस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता, जिससे यह विवाद और गहरा गया

विश्व मुक्केबाज़ी संघ का निर्णय
विश्व मुक्केबाज़ी संघ (World Boxing Federation) ने हाल ही में घोषणा की है कि भविष्य में सभी महिला मुक्केबाज़ों को अनिवार्य रूप से क्रोमोसोम परीक्षण से गुजरना होगा। खलीफ को तब तक किसी भी प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जब तक वे नया परीक्षण नहीं करवा लेतीं ।
खलीफ की प्रतिक्रिया
खलीफ ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि वे जन्म से महिला हैं और हमेशा महिला के रूप में ही पली-बढ़ी हैं। उन्होंने इन आरोपों को “राजनीतिक साजिश” करार दिया है और कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है ।
अन्य खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया
इटली की मुक्केबाज़ एंजेला कारिनी ने पेरिस ओलंपिक में खलीफ के खिलाफ मुकाबला शुरू होने के 46 सेकंड बाद ही मुकाबला छोड़ था, जिससे यह विवाद और बढ़ गया। कई खिलाड़ियों ने खलीफ के खिलाफ मुकाबले में अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है ।
लैंगिक पहचान और खेल
यह विवाद खेलों में लैंगिक पहचान और भागीदारी को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म देता है। क्या जैविक लिंग के आधार पर खिलाड़ियों की श्रेणियाँ निर्धारित की जानी चाहिए, या फिर उनकी पहचान और सामाजिक लिंग को भी महत्व दिया जाना चाहिए? यह सवाल अब अंतर्राष्ट्रीय खेल संगठनों के सामने है।
निष्कर्ष
इमान खलीफ का मामला केवल एक खिलाड़ी की लैंगिक पहचान का नहीं, बल्कि पूरे खेल जगत में लैंगिक समानता, पहचान और निष्पक्षता को लेकर एक बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अंतर्राष्ट्रीय खेल संगठन इस मुद्दे को कैसे सुलझाते हैं और खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा कैसे करते हैं।
