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देसी ब्रांड का देसी ड्रिंक लाहौरी ज़ीरा बना बाज़ार का सिरमौर

भारत जैसे देश में, जहाँ देसी स्वाद की अपनी एक खास जगह है, वहाँ लाहौरी ज़ीरा ने पेय पदार्थों की दुनिया में एक अलग पहचान बना ली है। सौरभ मुन्‍जाल द्वारा शुरू किया गया यह ब्रांड आज हर किसी की जुबान पर चढ़ चुका है। गैस वाली विदेशी ड्रिंक्स के बीच एक हेल्दी, टेस्टी और देसी ऑप्शन लाकर लाहौरी ज़ीरा ने न केवल बाज़ार में अपनी पकड़ बनाई है, बल्कि देसी स्टार्टअप्स के लिए एक प्रेरणा भी बन गया है।

Courtesy – thestartupcaffe.com

 

सौरभ मुन्‍जाल और लाहौरी ज़ीरा की कहानी
इस ब्रांड की शुरुआत एक सिंपल से आइडिया से हुई – कुछ ऐसा पेश करना जो देसी भी हो और हेल्दी भी। सौरभ मुन्‍जाल ने देखा कि देश में विदेशी कोल्ड ड्रिंक्स तो बिक रही हैं, लेकिन लोग अब कुछ देसी, नेचुरल और हेल्दी पीना चाहते हैं। यहीं से आइडिया आया लाहौरी ज़ीरा का – एक ऐसा ड्रिंक जिसमें ज़ीरे का तीखा और मसालेदार स्वाद हो, और साथ ही पाचन में भी मदतगार हो।

शुरुआत छोटी सी थी, लेकिन स्वाद और क्वालिटी के दम पर इस ब्रांड ने कम समय में लोगों के दिलों में जगह बना ली। ब्रांड ने दाम को भी लोगों की पहुंच में रखा और ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाने पर ध्यान दिया। धीरे-धीरे लाहौरी ज़ीरा शहरों से लेकर गाँवों तक पहुँच गया।

लाहौरी ज़ीरा की ग्रोथ की कहानी
लाहौरी ज़ीरा की सफलता कोई संयोग नहीं, बल्कि रणनीति, मेहनत और समझदारी का नतीजा है। ब्रांड ने एक ऐसा प्रॉडक्ट दिया, जो लोगों के स्वाद, सेहत और बजट – तीनों से मेल खाता था। स्मार्ट पैकेजिंग, एग्रेसिव मार्केटिंग और मज़बूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के ज़रिए लाहौरी ज़ीरा ने बाज़ार में अपनी धाक जमा दी।

सोशल मीडिया और डिजिटल कैंपेन ने ब्रांड को यंग जेनरेशन के बीच फेमस बना दिया। साथ ही, मॉल्स, किराना दुकानों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर इसकी आसान उपलब्धता ने इसकी बिक्री को और तेज़ किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, FY-24 में लाहौरी ज़ीरा का टर्नओवर करीब 250-300 करोड़ रुपये के बीच रहा – जो इसकी तेज़ तर्रार ग्रोथ को दर्शाता है।

भारत में हेल्दी ड्रिंक की बढ़ती डिमांड
अब लोग हेल्थ के प्रति पहले से ज़्यादा सजग हो गए हैं। ज़्यादातर लोग अब ज़्यादा मीठे, गैस वाले ड्रिंक्स की जगह देसी, नेचुरल और सेहतमंद ऑप्शन की तलाश में रहते हैं। ऐसे में लाहौरी ज़ीरा जैसे ब्रांड की डिमांड लगातार बढ़ रही है।

ज़ीरा युक्त यह ड्रिंक न सिर्फ स्वाद में बढ़िया है, बल्कि पाचन में मदद करता है, बॉडी को ठंडक देता है और मेटाबॉलिज़्म भी सुधारता है। यही कारण है कि हेल्थ कॉन्ससियस लोगों के बीच इसकी पकड़ मज़बूत होती जा रही है।

देसी ड्रिंक्स का बढ़ता बाज़ार
लाहौरी ज़ीरा अकेला नहीं है जो देसी ड्रिंक्स की दुनिया में क्रांति ला रहा है। आज कई ब्रांड आम पना, बेल शरबत, शिकंजी जैसे पारंपरिक भारतीय स्वादों के साथ बाज़ार में आ चुके हैं। ये ब्रांड उन लोगों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं, जो देसी पसंद करते हैं और केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स से दूर रहना चाहते हैं।

लाहौरी ज़ीरा की सफलता ये साबित करती है कि भारतीय स्वाद में दम है और देसी ब्रांड्स भी बड़े-बड़े इंटरनेशनल ब्रांड्स को टक्कर दे सकते हैं – बस ज़रूरत है सही प्रोडक्ट, सही मार्केटिंग और लोगों की पसंद की समझ की।


निष्कर्ष
एक छोटे से स्टार्टअप से लेकर भारत के सबसे चर्चित देसी ड्रिंक ब्रांड बनने तक का सफर लाहौरी ज़ीरा के लिए आसान नहीं रहा – लेकिन सोच और समझ के दम पर यह मुमकिन हुआ। सौरोभ मुन्‍जाल की सोच, देसी स्वाद की पकड़ और हेल्थ पर फोकस – इन तीनों ने मिलकर इस ब्रांड को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।

जैसे-जैसे देश में हेल्दी और देसी ड्रिंक्स की डिमांड बढ़ रही है, लाहौरी ज़ीरा आने वाले वक्त में भी मार्केट में अपनी पकड़ बनाए रखेगा और देसी फ्लेवर के साथ नए मुकाम हासिल करेगा।

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