नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में सबवेंशन योजना के तहत फ्लैट बुक करने वाले हजारों खरीदारों को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा है। बिल्डरों और बैंकों के बीच कथित गठजोड़ ने इस योजना को भ्रष्टाचार का माध्यम बना दिया, जिससे खरीदारों को बिना घर के ही ईएमआई चुकानी पड़ी। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

सबवेंशन योजना
सबवेंशन योजना एक त्रिपक्षीय समझौता होता है, जिसमें खरीदार, बिल्डर और बैंक शामिल होते हैं। इस योजना के तहत, खरीदार फ्लैट की कुल कीमत का 5% से 20% अग्रिम भुगतान करता है, जबकि शेष राशि के लिए बैंक से ऋण लिया जाता है। बिल्डर इस ऋण की लोन ब्याज (प्री-ईएमआई) का भुगतान तब तक करता है, जब तक कि फ्लैट का कब्जा खरीदार को नहीं मिल जाता। खरीदार की ईएमआई भुगतान की जिम्मेदारी कब्जा मिलने के बाद शुरू होती है।
घोटाले का खुलासा
हाल के वर्षों में, कई बिल्डरों ने इस योजना का दुरुपयोग किया। उन्होंने खरीदारों के नाम पर ऋण लेकर बैंक से पूरी राशि प्राप्त की, लेकिन निर्धारित समय पर परियोजनाओं को पूरा नहीं किया। बिल्डरों द्वारा लोन ब्याज (प्री-ईएमआई) का भुगतान बंद करने के बाद, बैंकों ने खरीदारों से ऋण की वसूली शुरू कर दी, जबकि उन्हें अभी तक फ्लैट का कब्जा नहीं मिला था। इससे खरीदारों को दोहरी मार झेलनी पड़ी—बिना घर के ईएमआई चुकाना और किराए पर रहना।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए CBI को जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने पाया कि बिल्डरों और बैंकों के बीच “गठजोड़” ने गरीब और मध्यमवर्गीय खरीदारों को बंधक बना दिया है। कोर्ट ने CBI को सात प्रारंभिक जांचें (PEs) दर्ज करने का निर्देश दिया, जिनमें से पहली जांच सुपरटेक लिमिटेड की परियोजनाओं पर केंद्रित होगी। अन्य जांचें नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे, गुरुग्राम और गाजियाबाद के परियोजनाओं पर होंगी। इसके अलावा, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, मोहाली और इलाहाबाद की परियोजनाएं भी जांच के दायरे में आएंगी।

प्रभावित परियोजनाएं और बिल्डर
CBI ने यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) से चार आवासीय परियोजनाओं—सुपरटेक की UP कंट्री, ओएसिस रियलटेक की ग्रैंडस्टैंड, और जेपी ग्रुप की कोव और कसिया—से संबंधित दस्तावेज प्राप्त किए हैं। इन परियोजनाओं में भूमि आवंटन फाइलें, पट्टा विलेख, स्वीकृत भवन योजनाएं, भुगतान रिकॉर्ड और आधिकारिक पत्राचार शामिल हैं।

खरीदारों की पीड़ा
कई खरीदारों ने बताया कि उन्होंने 2010 से 2015 के बीच फ्लैट बुक किए थे, लेकिन आज तक उन्हें कब्जा नहीं मिला। उदाहरण के लिए, अजय कुमार रस्तोगी ने 2010 में सुपरटेक की इकोविलेज 3 में फ्लैट बुक किया और 15 वर्षों तक ऋण चुकाया, लेकिन अभी तक उन्हें फ्लैट नहीं मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि जब परियोजना की योजनाएं स्वीकृत नहीं थीं, तब बैंकों ने ऋण कैसे स्वीकृत किया।
नियामक संस्थाओं की भूमिका
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), राष्ट्रीय आवास बैंक (NHB), रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) और स्थानीय विकास प्राधिकरणों को CBI की जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है। इन संस्थाओं के उप सचिव स्तर के अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो जांच टीम को समय पर जानकारी और सहयोग प्रदान करेंगे।
निष्कर्ष
सबवेंशन योजना का उद्देश्य खरीदारों को राहत प्रदान करना था, लेकिन बिल्डरों और बैंकों के गठजोड़ ने इसे भ्रष्टाचार का माध्यम बना दिया। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और CBI की जांच से उम्मीद है कि दोषियों को सजा मिलेगी और खरीदारों को न्याय मिलेगा। यह मामला एक चेतावनी है कि वित्तीय योजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी आवश्यक है, ताकि आम नागरिकों के हितों की रक्षा की जा सके।
