जनरल

नोएडा में बिल्डर्स की मनमानी पर प्रशासन की सख्ती                             खरीदारों की रजिस्ट्री में देरी पर अल्टीमेटम

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के हजारों फ्लैट खरीदारों को वर्षों से अपने घरों की रजिस्ट्री का इंतजार है। बिल्डर्स की लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता के चलते ये खरीदार कानूनी अधिकारों से वंचित हैं। अब, गौतम बुद्ध नगर प्रशासन ने इस स्थिति पर सख्त रुख अपनाते हुए 95 हाउसिंग सोसाइटियों को नोटिस जारी किए हैं और बिल्डर्स को अंतिम चेतावनी दी है।

समस्या की जड़

पूर्ण भुगतान के बावजूद रजिस्ट्री नहीं: कई खरीदारों ने फ्लैट की पूरी कीमत चुका दी है, फिर भी उन्हें रजिस्ट्री नहीं मिली है।

बिल्डर्स की दलील: बिल्डर्स का कहना है कि उन्हें ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) नहीं मिला है, जिससे रजिस्ट्री में देरी हो रही है। हालांकि, जिन फ्लैटों के लिए OC मिल चुका है, उनकी रजिस्ट्री भी लंबित है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया: जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने स्पष्ट किया है कि यदि बिल्डर्स समय पर रजिस्ट्री नहीं कराते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें प्रोजेक्ट सील करना भी शामिल है।

बिल्डर्स की मनमानी और प्रशासन की सख्ती

66 बिल्डर्स को नोटिस: स्टांप और रजिस्ट्री विभाग ने 66 डेवलपर्स को नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने 23,000 से अधिक फ्लैट्स का कब्जा देने के बावजूद रजिस्ट्री नहीं कराई है।

₹500 करोड़ की वसूली: प्रशासन ने ₹500 करोड़ से अधिक की बकाया राशि की वसूली के लिए बिल्डर्स के खिलाफ “मुनादी” (ढोल पीटकर घोषणा) करने और संपत्तियों को कुर्क करने की योजना बनाई है।

प्रशासन की चेतावनी: जिलाधिकारी ने बिल्डर्स को चेतावनी दी है कि यदि वे समय पर रजिस्ट्री नहीं कराते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

खरीदारों की कानूनी लड़ाई

उच्च न्यायालय में याचिका: महागुन मिराबेला सोसाइटी के 65 खरीदारों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने रजिस्ट्री में देरी के खिलाफ न्याय की मांग की है।

बिल्डर्स के खिलाफ FIR: स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट्स से जुड़े तीन बिल्डर्स—ज़ानाडू एस्टेट, लोटस ग्रीन्स और लॉजिक इन्फ्रा डेवलपर्स—पर खरीदारों के पैसे के गबन के आरोप में FIR दर्ज की गई है।

आंकड़ों में रियल एस्टेट संकट

8,000 से अधिक फ्लैट्स की रजिस्ट्री अटकी: ग्रेटर नोएडा के नौ प्रोजेक्ट्स में ₹400 करोड़ से अधिक की बकाया राशि के कारण 8,000 से अधिक फ्लैट्स की रजिस्ट्री अटकी हुई है।

स्टांप शुल्क में नुकसान: रजिस्ट्री में देरी के कारण राज्य सरकार को स्टांप शुल्क में भारी नुकसान हो रहा है। 2022-23 में नोएडा में 1.4 लाख से अधिक संपत्तियों की रजिस्ट्री हुई, जिससे ₹3,018 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ।

समाधान और आगे की राह

प्रशासन की पहल: जिलाधिकारी ने बिल्डर्स को निर्देश दिया है कि वे जिन फ्लैट्स के लिए OC प्राप्त कर चुके हैं, उनकी रजिस्ट्री तुरंत करें, और बाकी के लिए OC प्राप्त करने की प्रक्रिया तेज करें।

खरीदारों की जागरूकता: खरीदारों को चाहिए कि वे रजिस्ट्री की स्थिति की जानकारी रखें और आवश्यक कानूनी कदम उठाएं।

बिल्डर्स की जिम्मेदारी: बिल्डर्स को चाहिए कि वे खरीदारों के साथ पारदर्शिता बनाए रखें और समय पर रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी करें।

निष्कर्ष: खरीदारों के अधिकारों की रक्षा आवश्यक

नोएडा में रियल एस्टेट संकट ने हजारों खरीदारों को प्रभावित किया है। प्रशासन की सख्ती और कानूनी कार्रवाई से स्थिति में सुधार की उम्मीद है। हालांकि, खरीदारों को भी सतर्क रहना होगा और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी होगी।

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