12 जून की सुबह अहमदाबाद की सड़कों पर रोज़ के जैसी रफ़्तार थी – दोपहर 1:39 बजे, एयर इंडिया की Boeing 787-8 Dreamliner, फ्लाइट नंबर AI‑171, रनवे से लंदन के लिए उड़ान भरती है ।
विमान में सवार थे 230 लोग जिसमें 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश नागरिक, 7 पुर्तगाली और 1 कनाडाई। हर एक की अपनी कहानी थी, किसी की पहली यूरोप यात्रा, तो किसी की नौकरी का नया मुकाम।

कैप्टन और फर्स्ट ऑफिसर
कॉकपिट में बैठे थे दो कप्तान –
- कैप्टन सुमीत सभरवाल, उम्र 56, विंग्स पर 15,600 घंटे का अनुभव, जिनका आधा करियर Dreamliner पर ही बीता था।
- उनके साथी फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंडर, सिर्फ 32 साल के, पर उड़ान का तजुर्बा 3,400 घंटे का – करीब 1,100 घंटे इसी Dreamline विमान पर बीता था।
दोनों की बॉन्डिंग ऐसी थी जैसे कॉन्फिडेंस और टेक्नोलॉजी का मेल।

वो 32 मुश्किल सेकण्ड्स
टेकऑफ़ के तुरंत बाद, ब्लैक बॉक्स ने जो रिकॉर्ड किया, उसने सब कुछ बदल दिया।
दोनों engine कंट्रोल स्विच “RUN” से “CUTOFF” पर चले गए — एकदम अचानक।
फिर आवाज आई —
“Why did you cut off the fuel?”
दूसरा जवाब देता है —
“I did not do so.”
ये सवाल–जवाब चौंकाने वाले थे — फ्लाइट में दो अनुभवी कप्तानों के बीच उलझन, और यह सब हुआ सिर्फ 32 सेकण्ड्स में।
और तभी विमान नीचे की ओर झुकता है – मौत के अंधेरे की ओर रुख़ करता हुआ – और B.J. Medical हॉस्टल के ऊपरी हिस्से से टकरा जाता है। 32 सेकण्ड्स में पूरे की पूरी ज़िंदगियाँ हवा में थीं, और वहीं धड़ाम से सब खत्म हो गया।

उम्मीद या करिश्मा
इस हादसे में 241 यात्री, 12 क्रू मेंबर्स, और 19 हॉस्टल में रहने वाले—कुल 260 लोग जान गंवा बैठे।
लेकिन बचा एक नाम – Vishwash Kumar Ramesh, ब्रिटिश नागरिक। उन्होंने बताया कि वे सीट 11A पर बैठे थे, emergency exit के पास।
उन्होंने कहा “मैं कूद गया, भागा निकल गया,” उन्होंने कहा – इतनी हिम्मत कि मौत के बीच से भी बच निकला।
इस हादसे में जो एक बच गया, उसने सबको बताया—ज़िंदगी की रफ्तार तेज़ हो सकती है, लेकिन उम्मीद की किरण जब तक साथ है, रुकना कभी नहीं।
अब इंतज़ार है और जवाब चाहिए
ब्लैक बॉक्स की रिपोर्ट हमें ये जरूर बताती है —
- 32 सेकंड में स्विच कैसे ऑफ हो गया ?
- क्या यह इंसानी भूल थी – या कोई तकनीकी दिक्कत ?
- क्या Boeing ने safeguarding में कोई कमी छोड़ी थी ?
अब इंतज़ार है – government, DGCA, AAIB, Boeing, FAA—सभी अपनी जांच में लगे हैं। हमें धैर्य रखना होगा, क्योंकि जल्दबाज़ी सवालों का जवाब नहीं दे सकेगी।
जवाबों का इंतज़ार और चुप्पी का बोझ
“कहीं कुछ तो गलत हुआ है…”
13 जून की सुबह, जब न्यूज़ चैनलों पर अहमदाबाद हादसे की हेडलाइन्स चलीं —
“Dreamliner गिरा, 260 की मौत” — तब देश स्तब्ध था।
लोग कहने लगे: “Air India? Dreamliner? ये कैसे हो सकता है?”
Dreamliner, Boeing का सबसे एडवांस्ड और भरोसेमंद विमान, जिसकी टेक्नोलॉजी को दुनिया सलाम करती है… वो अचानक हवा में ही फेल हो गया?
जहाँ आमतौर पर हादसों का कारण तकनीकी खामी या मौसम होता है, वहाँ इस बार सवाल कुछ और थे।
और जब ब्लैक बॉक्स से रिकॉर्डिंग सामने आईं— “Why did you cut off the fuel?” और जवाब— “I did not do so.” — तब शक और गहरा गया।
पायलट यूनियन का ग़ुस्सा
Air India की पायलट यूनियन ने रिपोर्ट आने के तुरंत बाद प्रेस कांफ्रेंस बुलाई।
उनका साफ़ कहना था –
“Rushing to blame pilot error based on a 1.5-page summary is unfair. Where is the full report?”
वो बोले कि –
- पूरा डेटा नहीं दिखाया गया है।
- Cockpit voice recorder के सिर्फ कुछ सेकंड दिखाए गए हैं।
- जांच अधूरी है।
“हमारे साथियों को बलि का बकरा मत बनाओ”
पायलट्स ने कहा कि ये महज़ इंसान की भूल नहीं हो सकती — जिस तरह दोनों इंजन के फ्यूल कट-ऑफ स्विच एक साथ ट्रिगर हुए, वो या तो system glitch है या mechanical override failure।
Boeing का जवाब और बढ़ती चिंता
इस घटना के बाद Boeing ने सिर्फ एक छोटा सा बयान दिया –
“We are assisting in the investigation and deeply regret the loss of lives.”
पर लोगों ने पूछा:
क्या ये वही Boeing है जिसने पिछले कुछ सालों में –
- 737 MAX के दो बड़े हादसे देखे?
- माउंटिंग software errors से निपटा?
- और हाल ही में safety checks में fail हुआ?
ये तो मानो सवाल बड़ा है — क्या हमारी हवाई जहाज की सवारी अब वाकई सुरक्षित है?
परिवारों का दर्द और संघर्ष
Ahmedabad की गलियों में अब भी एक सन्नाटा है।
BJ Medical हॉस्टल की छत जो टूटी, वहाँ अब बस एक अस्थाई मेमोरियल है।
हर ईंट जैसे चिल्ला रही हो: “किसकी गलती थी?”
एक पीड़ित बाप जिनका बेटा मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था, रोते हुए कहते हैं –
“एक सपने के लिए हमने गांव छोड़ा था, शहर आए थे… अब हम खाली हाथ लौटेंगे।”
एक माँ ने बताया –
“जब विमान गिरा, मेरा बेटा Zoom पर क्लास में था। उसकी आवाज़ रुक गई… और मेरी दुनिया भी।”
DGCA और सरकार का रुख
DGCA (Directorate General of Civil Aviation) ने अब तक सिर्फ इतना कहा है कि –
“Final report का इंतज़ार करें। कार्रवाई ज़रूर होगी।”
लेकिन जब तक एक स्पष्ट जवाब नहीं आता, तब तक –
- लोगों का भरोसा डगमगाता रहेगा,
- Air India की साख पर दाग रहेगा,
- और Boeing को हर नई उड़ान से पहले सफाई देनी पड़ेगी।
क्या सीखा हमने?
हर हादसे के बाद हम कहते हैं — अब सुधार होगा। अब सतर्कता बढ़ेगी।
पर कड़वा सच यही है कि –
- सुरक्षा सिर्फ नियमों से नहीं, इंसानियत और जवाबदेही से आती है।
- technology कभी infallible नहीं होती — इंसानी सावधानी ही आखिरी सुरक्षा है।
- और… silence is not always golden, especially when lives are at stake.
हमें चाहिए –
- पूरी पारदर्शिता,
- समयबद्ध रिपोर्ट्स,
- और accountability — चाहे वो Air India हो, Boeing हो या DGCA.
कहानी अधूरी नहीं… एक चेतावनी है
ये सिर्फ एक ब्लॉग नहीं, एक दस्तावेज़ है — उन 260 कहानियों का जो अधूरी रह गईं।
यह हादसा हमें याद दिलाता है –
उड़ानें सिर्फ तकनीक से नहीं, भरोसे से चलती हैं।
और भरोसा तब बनता है जब सिस्टम जवाबदेह हो।
“Dreamliner” नाम की ये प्लेन अब सिर्फ एक प्लेन नहीं, एक सबक है।
